मुंबई (विशेष प्रतिनिधि): क्या मुंबई में कानून का राज खत्म हो चुका है? क्या मालाड अब भू-माफियाओं की निजी जागीर बन गया है? मालाड वेस्ट के भाद्रन नगर (वार्ड 35) से जो खबर सामने आई है, वह सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली है। यहाँ रेलवे ट्रैक के पास हो रहे अवैध निर्माण का विरोध करने पर पूर्व बीजेपी वार्ड अध्यक्ष जिग्नेश पर जानलेवा हमला किया गया। यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि प्रशासन के मुँह पर एक करारा तमाचा है।
साजिश: महिलाओं की ओट में खूनी खेल
भू-माफियाओं की कायराना हरकत देखिए—जिग्नेश को घेरने के लिए उन्होंने महिलाओं को ढाल बनाया और फिर अचानक टूट पड़े। पीड़ित जिग्नेश ने आरोप लगाया कि हमलावरों के हौसले इतने बुलंद थे कि उनमें से एक ने उन्हें “जिंदा जलाने” तक की बात कही, लेकिन मौके पर मौजूद कुछ लोगों के हस्तक्षेप के कारण बड़ी अनहोनी टल गई।
वर्दी पर दाग: मालाड पुलिस की संदिग्ध ‘सुस्ती’
इस मामले में सबसे शर्मनाक भूमिका मालाड पुलिस की रही। हमलावर नामजद थे— कर्सन गोजविया, विपुल भोजाविया, भरत और बचुभाई। फिर भी, मालाड पुलिस को FIR दर्ज करने में पूरा एक दिन लग गए। सवाल उठता है कि क्या पुलिस किसी ‘ऊपर’ के आदेश का इंतज़ार कर रही थी? या फिर कर्सन गोजविया की तिजोरी की चमक ने कानून की आँखों पर पट्टी बांध दी है?
BMC की लाचारी या वफादारी?

बीएमसी अधिकारी कुंदन वळवी के नाक के नीचे रेलवे सुरक्षा क्षेत्र में अवैध निर्माण खड़ा हो गया, लेकिन उनका बुलडोजर लकवाग्रस्त हो चुका है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार खबर दिखाए जाने के बावजूद निर्माण का एक पत्थर तक नहीं हिला। क्या बीएमसी के अधिकारियों ने माफिया कर्सन गोजविया के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है?

वशिष्ठ वाणी के तीखे सवाल:
- पुलिस कमिश्नर जवाब दें: एक पूर्व जनप्रतिनिधि पर हमला होने के बाद भी FIR में देरी क्यों? क्या पुलिस माफियाओं की ‘इवेंट मैनेजर’ बन गई है?
- BMC कमिश्नर गौर फरमाएं: कुंदन वळवी जैसे अधिकारियों पर कार्यवाही कब होगी, जो अवैध निर्माण को अपनी मौन सहमति दे रहे हैं?
- क्या रेलवे सुरक्षा भगवान भरोसे है? पटरियों के पास यह निर्माण किसी बड़े रेल हादसे को दावत दे रहा है, इसका जिम्मेदार कौन होगा?
अंतिम चेतावनी: वशिष्ठ वाणी इस माफिया-राज का पर्दाफाश करना जारी रखेगी। जब तक कर्सन गोजविया जैसे गुंडों के अवैध साम्राज्य पर बुलडोजर नहीं चलता, हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।










