म्हाडा मैदान के कथित अवैध व्यवसायीकरण पर जांच की मांग तेज..
मालवणी, मुंबई | वशिष्ठ वाणी स्पेशल रिपोर्ट। मालवणी के युवाओं के लिए खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहे म्हाडा मैदान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय संगठनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस महासंघ के पदाधिकारी दत्ता चौधरी द्वारा मैदान का अवैध रूप से व्यवसायीकरण किया जा रहा है, जो मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मैदान वर्षों से बच्चों, युवाओं और खेल प्रेमियों के लिए उपलब्ध था, लेकिन अब इसे तीसरे पक्ष को व्यावसायिक उपयोग के लिए देने की कोशिश की जा रही है।
लीज रद्द करने और जांच की माँग
गैलेक्सी स्पोर्ट्स एंड कल्चरल फाउंडेशन के प्रमुख जुल्फिकार अली उर्फ गुड्डू भाई ने वशिष्ठ वाणी से बातचीत में कहा कि:
“म्हाडा प्रशासन द्वारा दी गई लीज तुरंत रद्द की जानी चाहिए। पुलिस महासंघ और वीनस नामक तृतीय पक्ष के बीच हुए अवैध करारनामे की भी जांच जरूरी है। यह सार्वजनिक जमीन को हथियाने का प्रयास प्रतीत होता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला युवाओं के खेल अधिकारों के खिलाफ है और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए।
युवाओं में बढ़ता आक्रोश – उग्र आंदोलन की चेतावनी
जुल्फिकार अली ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा:
“अगर अवैध गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो मालवणी के युवा सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। सरकार को पहले से बता देना चाहते हैं कि न्याय न मिलने पर किसी भी अनहोनी के लिए महाराष्ट्र शासन जिम्मेदार होगा।”
स्थानीय संगठनों का कहना है कि मैदान पर किसी भी प्रकार का व्यवसायिक कब्जा न केवल नियमों के विपरीत है बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य और स्वास्थ्य से खिलवाड़ भी है।
प्रशासन अब तक मौन
इस मामले में म्हाडा प्रशासन और स्थानीय शासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हालांकि, नागरिक समूह मांग कर रहे हैं कि:
- लीज और करारनामों की जाँच हो
- मैदान मूल उपयोग (खेल) के लिए वापस मिले
- किसी भी अवैध कब्जे पर तुरंत रोक लगे
क्या होगा आगे?
अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस गंभीर आरोप को कितनी तवज्जो देती है और क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मैदान बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।


