मुंबई/वशिष्ठ वाणी। विशेष रिपोर्ट
कांदिवली ट्रैफिक डिविजन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सतीश राउत एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। आरोप है कि उन्होंने मालाड (पश्चिम) के सामना नगर, मालवणी गेट नंबर 8, म्हाडा परिसर में लंबे समय से चल रही अवैध पार्किंग को संरक्षण दिया, और इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित करने वाले एक मीडिया प्रतिनिधि से व्हाट्सएप पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
🔴 अवैध पार्किंग का आरोप — संगठन के नाम का सहारा?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, “डॉ. अब्दुल कलाम संस्था फेडरेशन” के नाम से चल रहे संगठन द्वारा म्हाडा की सड़क के दोनों ओर अवैध पार्किंग काफी समय से संचालित की जा रही है।
- पहले यहाँ पार्किंग शुल्क भी वसूला जाता था
- म्हाडा द्वारा नोटिस जारी होने के बाद शुल्क तो बंद हुआ, लेकिन पार्किंग अब भी जारी है
निवासी इसे सीधा-सीधा सिस्टम की लापरवाही और स्थानीय अधिकारियों की मौन सहमति मान रहे हैं।

🔥 फायर ब्रिगेड की चेतावनी नज़रअंदाज़?
फायर ब्रिगेड विभाग ने इस पार्किंग पर लिखित शिकायत दर्ज कर चेतावनी दी थी:
“सड़क के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग से फायर टेंडर का आवागमन बाधित होगा और किसी भी आपात स्थिति में निवासियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।”
इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

🔍 इंस्पेक्टर राउत का दावा और सवाल
इंस्पेक्टर सतीश राउत ने घटनास्थल का निरीक्षण करने की बात कही और दावा किया:
“वहाँ फेडरेशन का बोर्ड और एक केबिन मिला, जिसमें सुरक्षा गार्ड बैठा था।”
लेकिन स्थानीय निवासियों और मीडिया के अनुसार—

- म्हाडा के नोटिस के बाद केबिन बंद पड़ा है
- कोई सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं
- ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इंस्पेक्टर राउत को वास्तव में क्या दिखाई दिया?
- और म्हाडा तथा फायर ब्रिगेड के आधिकारिक पत्र उनके संज्ञान में क्यों नहीं आए?
📱 मीडिया से अभद्रता का आरोप
पार्किंग मामले से जुड़े सवालों पर मीडिया प्रतिनिधि ने जब इंस्पेक्टर राउत से संपर्क किया, तो आरोप है कि उन्होंने व्हाट्सएप पर असभ्य और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया।
बाद में वह संदेश डिलीट कर दिया गया, लेकिन मीडिया के पास उसका स्क्रीनशॉट मौजूद है।

⚖️ मामला हाई कोर्ट तक पहुँचने की तैयारी में
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जानकारी कांदिवली ट्रैफिक डिविजन के ACP को भी है,
इसके बावजूद अब तक कोई विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है।
मीडिया हाउस ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित अधिकारी पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला सीधे बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका के रूप में ले जाया जाएगा।
🚨 स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों ने निम्न मांगें उठाई हैं—
- अवैध पार्किंग तुरंत हटाई जाए
- इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच
- आवश्यकता पड़ने पर निलंबन की कार्रवाई
- डीसीपी ट्रैफिक और पुलिस आयुक्त सीधे हस्तक्षेप करें
निवासियों का कहना है कि अवैध पार्किंग के कारण—
✔ लगातार जाम
✔ एंबुलेंस व फायर टेंडर की आवाजाही बाधित
✔ शाम के समय बढ़ती अव्यवस्था
अब यह एक जन–सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुका है।
सबकी नज़र अब इस सवाल पर…
क्या खाकी वर्दी जनता की सुरक्षा के लिए है,
या फिर कुछ चुनिंदा हितों की रक्षा के लिए?
रिपोर्ट जारी…
अगली अपडेट में— हाई कोर्ट में दाखिल होने वाली याचिका की प्रति भी प्रकाशित की जाएगी।


