Maharashtra News: इगतपुरी स्थित Manas Resort with Petting Zoo और ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म Make My Trip पर एक उपभोक्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्राहक का कहना है कि बुकिंग रद्द करने पर होटल और प्लेटफॉर्म दोनों ने “नो रिफंड पॉलिसी” का हवाला देते हुए उसकी राशि वापस नहीं की। इस घटना के बाद एक बार फिर से ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म्स और होटलों की रिफंड नीतियों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के अनुसार, ग्राहक ने 13 तारीख को होटल बुक किया था जबकि चेक-इन की तारीख 15 निर्धारित थी। किसी आपात स्थिति के कारण यात्रा संभव न होने पर ग्राहक ने उसी दिन यानी 13 तारीख को ही Make My Trip से संपर्क कर बुकिंग रद्द करने और रिफंड का अनुरोध किया। हालांकि ग्राहक न तो होटल गया और न ही सेवा का उपयोग किया, फिर भी रिफंड से इनकार कर दिया गया।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि चेक-इन से दो दिन पहले कैंसिलेशन होने पर होटल के पास कमरा पुनः बुक करने का पूरा अवसर रहता है, इसलिए पूर्ण राशि रोक लेना उपभोक्ता संरक्षण की भावना के विपरीत है। कई उपभोक्ता इस नीति को “राजस्व कमाने का छुपा तरीका” बताते हैं।
ग्राहक का आरोप है कि,
“नो रिफंड पॉलिसी अब व्यापार मॉडल नहीं, बल्कि धन रोकने का आसान साधन बन गई है। यदि होटल राशि वापस नहीं करता तो Make My Trip भी लाभ में रहता है, इसलिए ये नीतियाँ उपभोक्ता पर ही बोझ डालती हैं।”
यह पहला मामला नहीं है जब बुकिंग प्लेटफॉर्म या होटल पर नो रिफंड पॉलिसी के नाम पर धन रोकने के आरोप लगे हों। इससे पहले Dotom Group की बुकिंग पॉलिसी को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएँ सामने आ चुकी हैं।
कानूनी एंगल: उपभोक्ता के अधिकार क्या कहते हैं?
भारत का Consumer Protection Act स्पष्ट करता है कि यदि सेवा प्रदान ही नहीं की गई हो या सेवा लेने का अवसर ही न बना हो, तो उपभोक्ता रिफंड का दावा कर सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में ग्राहक का पक्ष मजबूत हो सकता है, क्योंकि सेवा उपयोग नहीं हुई और होटल के पास पुनः बुकिंग का समय भी उपलब्ध था।
शिकायत कहाँ की जा सकती है?
ऐसे मामलों में उपभोक्ता निम्न माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:
✔ राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH): 1800-11-4000 / 1915
✔ Consumer Disputes Redressal Forum / Consumer Court
✔ Make My Trip Grievance Redressal Mechanism
✔ Ministry of Tourism Complaint Cell
✔ सोशल मीडिया शिकायत (Twitter/X आदि)
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर शिकायत रखने से कंपनियाँ तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं क्योंकि उनकी ब्रांड छवि दांव पर होती है।
सिस्टम पर सवाल और उपभोक्ता चेतावनी
उद्योग विश्लेषण यह दर्शाता है कि भारत में होटल, बिल्डर और ट्रैवल प्लेटफॉर्म लगातार “नो रिफंड पॉलिसी” के माध्यम से उपभोक्ता का आर्थिक जोखिम बढ़ा रहे हैं। सिस्टम और नियामक हस्तक्षेप सीमित होने के कारण कंपनियों को नीतियों में बदलाव की आवश्यकता महसूस नहीं होती।
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि सरकार को इस क्षेत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे ताकि उपभोक्ता शोषण का शिकार न हो।
इस घटना के बाद उपभोक्ता विशेषज्ञ advising कर रहे हैं कि ऑनलाइन बुकिंग करते समय “नो रिफंड पॉलिसी” को जरूर पढ़ें और रिफंड शर्तों को समझें। अन्यथा यात्रा न होने की स्थिति में उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

