World News: मध्य पूर्व की राजनीति को झकझोर देने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed bin Salman Al Saud) ने हाल के हफ्तों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से कई बार निजी तौर पर बातचीत की थी।
रिपोर्ट के अनुसार, इन फोन कॉल्स में क्राउन प्रिंस ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की सलाह दी थी। उनका तर्क था कि यदि अभी कार्रवाई नहीं की गई, तो ईरान और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे भविष्य में खतरा बढ़ जाएगा।
सार्वजनिक रुख और निजी बातचीत में अंतर?
दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक मंचों पर सऊदी अरब ने हमेशा कूटनीति और संवाद का समर्थन किया था।
जनवरी में स्वयं मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि उनका देश ईरान पर किसी भी सैन्य हमले के लिए अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देगा।
लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निजी बातचीत में रुख इससे अलग था।
अमेरिका–इजरायल की संयुक्त कार्रवाई
इसके बाद अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना था कि ईरान से तत्काल बड़ा खतरा नहीं था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों की ओर से दबाव मौजूद था।
सऊदी अरब का खंडन
इन दावों को सऊदी अरब ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
सऊदी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा:
“हमने कभी भी ट्रंप प्रशासन से ईरान पर हमले की नीति अपनाने की अपील नहीं की। हमारा रुख हमेशा कूटनीतिक समाधान का समर्थन करने का रहा है।”
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और कतर के कुछ इलाकों को निशाना बनाए जाने की खबरें हैं।
मध्य पूर्व की स्थिति तेजी से बदल रही है और वैश्विक शक्तियों की नजर अब इस उभरते संकट पर टिकी हुई है।














