मुंबई/वशिष्ठ वाणी। देश की आर्थिक राजधानी Mumbai में इन दिनों एक अजीब तस्वीर देखने को मिल रही है। मलाड वेस्ट के चारकोप सिग्नल के पास फुटपाथ पर खुलेआम कब्ज़ा कर कारोबार चलाया जा रहा है, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, फुटपाथ जो आम नागरिकों के चलने के लिए होते हैं, वे अब “छोटे-छोटे बाजार” में तब्दील हो चुके हैं। यहां प्लास्टिक के अस्थायी घर बनाकर पौधों का कारोबार, हेलमेट बिक्री, खिलौनों की दुकानें और अन्य गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं।
❗ शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार BMC में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन हर बार कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रही। एक दिन के लिए अतिक्रमण हटाने का अभियान चलता है और अगले ही दिन वही स्थिति वापस लौट आती है—मानो “सब सेटिंग से चल रहा हो”।
⚠️ गंभीर आरोप—अधिकारियों की मिलीभगत?
लोगों का आरोप है कि बिना किसी “अंदरूनी सपोर्ट” के इतना बड़ा अतिक्रमण संभव ही नहीं। चर्चा यहां तक है कि यदि किसी का BMC के अधिकारियों से संपर्क है, तो उसे फुटपाथ पर “बिजनेस करने की जगह” तक मिल जाती है।
और अगर कोई आम नागरिक शिकायत करता है, तो कथित तौर पर वही अधिकारी पहले ही अतिक्रमणकारियों को “अलर्ट” कर देते हैं कि आज कार्रवाई होने वाली है। ऐसे में कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह जाती है।
🗣️ जनता का सवाल—क्या फुटपाथ भी अब किराए पर?
स्थानीय नागरिक तंज कसते हुए पूछ रहे हैं—
“क्या अब मुंबई में फुटपाथ भी किराए पर मिलने लगे हैं? अगर हां, तो इसका रेट क्या है और किससे संपर्क करें?”
🧾 प्रशासन पर कटाक्ष
यह स्थिति न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शहर में नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं।
जहां एक ओर आम दुकानदारों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं फुटपाथ पर खुलेआम कब्जा करने वालों पर “मेहरबानी” क्यों?
🚨 जिम्मेदार कौन?
- क्या BMC की लापरवाही?
- या फिर अधिकारियों की मिलीभगत?
- या फिर सिस्टम की कमजोरी?
📢 निष्कर्ष
मलाड वेस्ट का यह मामला सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में मुंबई के फुटपाथ पूरी तरह गायब हो सकते हैं।
👉 अब देखने वाली बात यह है कि Brihanmumbai Municipal Corporation इस पर कब और कितनी गंभीरता से कदम उठाती है—या फिर यह मुद्दा भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।









