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निशुल्क टीकाकरण अभियान में बड़ा सुराख, टीके लगाने से चूके बच्चों में मिजल्स का अटैक

जोधपुर। सरकार के निशुल्क टीकाकरण अभियान में बड़ा सुराख सामने आया है। मिजल्स का प्रकोप इस सीजन में तेजी से बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण बच्चों का समय पर टीकाकरण नहीं होना है। जोधपुर के उम्मेद अस्पताल के शिशु रोग विभाग में पिछले एक-डेढ़ माह में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

95 प्रतिशत बच्चे वैक्सीन से वंचित

500 से ज्यादा नए केस सामने आने और कई बच्चों के गंभीर स्थिति में पहुंचने पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने इनकी मेडिकल हिस्ट्री जांची। इसमें सामने आया कि करीब 95 प्रतिशत बच्चे वैक्सीन से वंचित हैं। सरकार की ओर से निशुल्क टीकाकरण उपलब्ध होने के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे इससे दूर हैं। इसके लिए ग्रामीण स्तर के चिकित्साकर्मी और अभिभावक दोनों जिम्मेदार हैं। यही वजह है कि मिजल्स के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

मेडिकल हिस्ट्री में खुलासा स्थिति यह है कि जो वैक्सीन 9 से 12 माह की उम्र में पहली खुराक के रूप में और उसके बाद दूसरे साल में बूस्टर डोज के रूप में दी जानी चाहिए, कई बच्चों को पहली खुराक भी नहीं लगी। जितने भी संक्रमित बच्चे सामने आए हैं, उनमें से अधिकांश की मेडिकल हिस्ट्री में इसका खुलासा हुआ। खास बात यह है कि छह से सात माह के बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। केवल जोधपुर में इस सीजन में अब तक करीब 100 बच्चों को भर्ती करना पड़ा है, जबकि पूरे प्रदेश में यह संख्या 1500 के पार पहुंच चुकी है।मिजल्स के आंकड़ेजोधपुर शहर में प्रतिदिन 10 से 15 नए केस सामने आ रहे हैं।प्रदेश में 400 से ज्यादा नए मामले रोज दर्ज हो रहे हैं।1500 से अधिक बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ चुकी है।9 से 12 माह की उम्र में पहली वैक्सीन लगती है।

क्या है मिजल्स बीमारी

मिजल्स एक वायरल संक्रमण है, जो हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के माध्यम से फैलता है। यदि कोई बच्चा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है या उसके आसपास की हवा में सांस लेता है, तो संक्रमण हो सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, जुकाम, आंखों में लालिमा और शरीर पर लाल चकत्ते शामिल हैं। गंभीर स्थिति में यह निमोनिया, डायरिया, कान का संक्रमण और दिमाग में सूजन जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।

एक्सपर्ट व्यू- संक्रामक होने के कारण ज्यादा चिंता

मिजल्स एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो कमजोर प्रतिरक्षा वाले बच्चों में गंभीर रूप ले सकती है। इसके बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां बनी हुई हैं, जिससे बच्चों की जान जोखिम में है। कई छोटे बच्चे आसपास के संक्रमित बच्चों के संपर्क में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।

  • डॉ. मोहन मकवाना, सीनियर प्रोफेसर व अधीक्षक, उम्मेद अस्पताल

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