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BMC का ‘लीपापोती’ मॉडल: राममंदिर SV रोड के गड्ढों में जनता की जान, और अधिकारियों का ‘दिखावा’ वाला अभियान!

मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों का हाल आजकल किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है। मालाड के राममंदिर SV रोड पर बने जानलेवा गड्ढों को लेकर ‘वशिष्ठ वाणी’ ने जब प्रशासन को जगाने का काम किया, तो BMC के जांबाज अधिकारी सक्रिय तो हुए, लेकिन उनका काम किसी समाधान की तरह नहीं, बल्कि एक घटिया मजाक की तरह निकला!

क्या गड्ढा भरना था या जनता की जान से खिलवाड़?

हैरत की बात तो तब हुई जब स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद BMC का अमला गड्ढे भरने पहुंचा। जनता को लगा कि राहत मिलेगी, लेकिन अधिकारियों ने वहां सिर्फ मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी। यह ‘लीपापोती’ इतनी कच्ची थी कि अगली ही बारिश या थोड़े से ट्रैफिक में वह मिट्टी बह गई और गड्ढे पहले से भी ज्यादा खतरनाक बनकर सामने आ गए।

लिपापोती का नतीजा: कार फंसी, जनता परेशान

BMC की इस अदूरदर्शी और ‘आलसी’ कार्यशैली का खामियाजा एक कार चालक को भुगतना पड़ा, जिसकी गाड़ी उन आधे-अधूरे भरे हुए गड्ढों में फंस गई। वहां मौजूद लोगों को गाड़ी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। यह मंजर साबित करता है कि BMC का ध्यान गड्ढे ठीक करने में नहीं, बल्कि सिर्फ फाइलों में ‘काम पूरा’ दिखाने में है।

अधिकारियों से ‘वशिष्ठ वाणी’ के तीखे सवाल:

  • इतनी जल्दी क्या थी? क्या उस सड़क को मिट्टी से भरकर आप किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे थे ताकि फाइलें जल्दी बंद हो सकें?
  • क्या यह आपकी इंजीनियरिंग का नमूना है? जो सड़क चंद घंटों का ट्रैफिक न झेल सके, उसे ‘मरम्मत’ कहना जनता के साथ सरासर धोखा नहीं है?
  • आखिर यह ‘लीपापोती’ क्यों? क्या आपको यह भी नहीं पता कि मानसून में मिट्टी से भरे गड्ढे ‘मौत का जाल’ बन जाते हैं?

BMC जाग जाओ, वरना जनता को सड़क पर उतरना आता है!

‘वशिष्ठ वाणी’ प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देता है कि अब जनता और मीडिया आपकी इस लीपापोती को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर राममंदिर SV रोड पर तत्काल वैज्ञानिक और टिकाऊ मरम्मत नहीं की गई, तो आपकी यह लापरवाही जनता के गुस्से का कारण बनेगी। अब सिर्फ कागजों पर काम नहीं चलेगा, सड़क पर हकीकत दिखनी चाहिए!

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