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वशिष्ठ वाणी का ‘आर-पार’ का संग्राम: RTO अधिकारी सतीश राउत से मांगा जवाब, ‘भारत गैस एजेंसी’ को आखिर किसने दी सड़क घेरने की छूट?

मुंबई: मुंबई की सड़कों पर चल रहे अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘वशिष्ठ वाणी’ ने अब सीधे प्रशासनिक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है। छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स, एकता नगर रोड पर ‘भारत गैस एजेंसी’ द्वारा सड़क के दोनों तरफ बनाए गए 24 घंटे अवैध गोदाम के मुद्दे पर ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने RTO अधिकारी सतीश राउत के खिलाफ आरटीआई (RTI) दाखिल कर दी है।

क्या है ‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा सवाल?

एकता नगर रोड, जो आम जनता के लिए आवागमन का मुख्य रास्ता है, वहाँ गैस एजेंसी ने सड़क के दोनों तरफ कब्ज़ा कर रखा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ की लीगल टीम ने RTI के जरिए यह जानना चाहा है कि:

  • इस अवैध गोदाम के पीछे किसका संरक्षण है?
  • अधिकारी सतीश राउत इसे हटाने में क्यों नाकाम रहे हैं या जानबूझकर मौन क्यों हैं?

सतीश राउत के दावों की खूलेगी पोल

RTO अधिकारी सतीश राउत का तर्क है कि ‘भारत गैस एजेंसी’ को महाराष्ट्र सरकार से इस जगह पर संचालन की अनुमति मिली है। लेकिन, ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस दावे को चुनौती देते हुए उन सरकारी दस्तावेजों (Permission Documents) की मांग की है।

‘वशिष्ठ वाणी’ की लीगल टीम का स्पष्ट कहना है: “यदि सरकार द्वारा जारी अनुमति का कोई वैध दस्तावेज़ नहीं मिलता, तो RTO अधिकारी सतीश राउत को कानूनी रूप से कोर्ट में घसीटा जाएगा। अब बहाने नहीं, सबूत चाहिए।”

जनता की सुरक्षा सर्वोपरि

सड़क को गोदाम बनाकर सरकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाना और उस पर जिम्मेदार अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होना, गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ‘वशिष्ठ वाणी’ इस मामले में तब तक पीछे नहीं हटेगी जब तक कि एकता नगर रोड पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त नहीं हो जाता।

क्या सतीश राउत के पास वह दस्तावेज़ है? या फिर यह भी एक और ‘भ्रष्टाचार का गठजोड़’ है? ‘वशिष्ठ वाणी’ की इस आरटीआई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

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