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मुंबई में ‘पावर’ के नशे में चूर Dotom डायरेक्टर: वशिष्ठ वाणी के मालिक को दी धमकी!

Dotom Group

मुंबई: आर्थिक राजधानी मुंबई में कानून का राज है या बिल्डर माफिया का? यह सवाल एक बार फिर तब खड़ा हो गया है जब ‘वशिष्ठ वाणी’ और ‘संसद वाणी’ के प्रकाशक अभिषेक अनिल वशिष्ठ को एक नामी डेवलपर द्वारा बर्बाद करने की धमकी दी गई। मामला ‘डोटोम’ (Dotom) बिल्डर से जुड़ा है, जो नियमों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में भारी मशीनों से अवैध निर्माण कार्य कर रहा है।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी

धमकी के बाद वशिष्ठ मीडिया हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं। वशिष्ठ मीडिया हाउस की लीगल टीम ने डोटोम के डायरेक्टर तुषार के खिलाफ मुंबई पुलिस कमिश्नर और चारकोप पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर को लिखित शिकायत सौंपने की पूरी तैयारी कर ली है। अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने कहा है कि अब यह मामला कानूनी मुकाम तक जाएगा और बिल्डर को कानून का सामना करना ही होगा।

क्या है पूरा मामला?

‘डोटोम’ डेवलपर द्वारा देर रात (12 बजे से सुबह 5 बजे तक) भारी मशीनों के उपयोग से स्थानीय निवासियों की नींद हराम की जा रही है। जब स्थानीय लोगों की शिकायतों पर ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इसकी कवरेज की और लापरवाही की पोल खोली, तो बिल्डर के डायरेक्टर तुषार को यह बात नागवार गुजरी।

सूत्रों के अनुसार, खबर प्रकाशित होने के बाद बिल्डर ने अभिषेक अनिल वशिष्ठ को फोन कर धमकी दी। बिल्डर ने अपनी राजनीतिक रसूख और ‘मुंबई का पैदाइशी’ होने का हवाला देते हुए कहा, “ऐसे काम-धंधे पर देख लूंगा, जिंदगी भर याद रखोगे।” इतना ही नहीं, बिल्डर ने अपने रसूख का प्रदर्शन करते हुए कहा कि वह विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं और मीडिया जगत में उनकी पकड़ है।

प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां

यह केवल धमकी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के खुले उल्लंघन का भी है:

  • 25 नवंबर 2025: बीएमसी द्वारा निर्माण कार्य रोकने (Stop Work Notice) का नोटिस जारी किया गया।
  • 07 फरवरी 2026: बीएमसी ने चारकोप पुलिस को कार्रवाई हेतु पत्र लिखा।
  • 20 फरवरी 2026: एसआरए (SRA) प्रोजेक्ट होने के कारण बीएमसी ने संबंधित विभाग को भी सूचित किया।

इसके बावजूद, काम लगातार जारी है। सवाल यह है कि आखिर कौन सी ताकत बिल्डर को कानून से ऊपर रख रही है? चारकोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 100 नंबर पर कॉल करने के बावजूद मौके पर पुलिस की चुप्पी कई संदेह पैदा करती है।

वशिष्ठ मीडिया हाउस का कड़ा रुख

धमकी के बाद अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इन गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता का धर्म सच दिखाना है। जहां भी अवैध कार्य होगा, वशिष्ठ वाणी और संसद वाणी की टीम वहां मौजूद रहेगी। हम कानून का पालन करते हैं और कानूनी प्रक्रिया के जरिए इस माफिया प्रवृत्ति का अंत करेंगे।”

निष्कर्ष

मुंबई जैसे महानगर में बिल्डर का इस प्रकार सरेआम पत्रकार को धमकाना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। क्या प्रशासन अब भी मौन रहेगा, या इस ‘पावर’ के नशे में चूर डेवलपर पर कार्रवाई होगी?

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