मुंबई: शहर के न्यू लिंक रोड, बांगुर नगर सिग्नल के पास की स्थितियां प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। वशिष्ठ वाणी के कैमरे में कैद हुई तस्वीरें इस बात का स्पष्ट सबूत हैं कि कैसे नियमों को ताक पर रखकर फुटपाथों पर अवैध रूप से कब्जा कर ‘धार्मिक गतिविधियों’ की आड़ में व्यापार किया जा रहा है। BMC प्रशासन से हमारा सीधा और स्पष्ट सवाल है—फुटपाथ पर इस अवैध कब्जे की अनुमति किसने दी?


सिस्टम और प्रशासन को वशिष्ठ वाणी की चुनौती:
- अवैध कब्जे की परमिशन कहाँ है? क्या BMC ने फुटपाथों को निजी व्यापार के लिए बेच दिया है? प्रशासन को अपनी दी गई अनुमति का सार्वजनिक प्रमाण देना होगा।
- जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़: फुटपाथ पर कब्जे के कारण पैदल चलने वाले लोग, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, सड़क पर चलने को मजबूर हैं। क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है?
- अब रास्ता सीधा कोर्ट का: हम सिर्फ सवाल नहीं पूछेंगे, अब जवाब की मांग कानूनी तौर पर की जाएगी। यदि अगले 48 घंटों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वशिष्ठ वाणी जनहित में माननीय न्यायालय (Court) का दरवाजा खटखटाएगी।
प्रशासन के लिए चेतावनी:
वशिष्ठ वाणी प्रशासन को आगाह करती है कि यह मामला अब केवल एक खबर नहीं, बल्कि जनता के मौलिक अधिकार और सुरक्षा का विषय बन चुका है। हम सिस्टम के इस भ्रष्टाचार के विरुद्ध तब तक अपनी मुहिम जारी रखेंगे, जब तक फुटपाथ को अवैध अतिक्रमण से मुक्त नहीं करा लिया जाता।
वशिष्ठ वाणी का संकल्प: सड़क से लेकर कोर्ट तक, जनता के हक की लड़ाई अब आर-पार की होगी!










