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म्हाडा के दो ‘अनमोल रत्न’: बी एस कटरे को नहीं दिखता विभागीय नोटिस, तो संतोष कांबले ने 15 साल पुराने वाटर टैंक पर सजवा दिया ‘इवेंट स्पॉट’!

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई में अगर आपको बिना किसी डर के अवैध निर्माण करना हो, आपातकालीन रास्तों पर डाका डालना हो, या सरकारी जमीन पर अवैध पार्किंग का धंधा चलाकर करोड़ों की वसूली करनी हो… तो डरिए मत! मालाड-मालवणी में म्हाडा (MHADA) के दो ऐसे ‘महान’ और ‘दयावान’ अधिकारी बैठे हैं, जो जनता के टैक्स से मोटी सैलरी तो लेते हैं, लेकिन काम सिर्फ दबंगों के फायदे का करते हैं। हम बात कर रहे हैं म्हाडा के दो महारथियों—उपनिबंधक बी.एस. कटरे और क्षेत्र निर्माण अधिकारी (गोरेगांव) संतोष कांबले की!

इन दोनों अधिकारियों की कार्यशैली इतनी अनोखी है कि अगर इनके कारनामों पर कोई कॉमेडी शो बनाया जाए, तो वह भी सुपरहिट हो जाए। चलिए, बारी-बारी से इन दोनों साहबों के ‘परोपकारों’ का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं।


महारथी नंबर 1: उपनिबंधक बी.एस. कटरे (उपाधि: ‘सबूतों के आगे पट्टी बांधने वाले उस्ताद’)

सामना नगर गेट नंबर 8 स्थित मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी में बंद हो चुके फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत की दबंगई किसी से छिपी नहीं है। म्हाडा की खाली जगह पर अवैध पार्किंग का धंधा चमकाया गया, इमरजेंसी एग्जिट लॉक किया गया और वाहन मालिकों से अपनी जागीर समझकर सालों तक वसूली की गई।


मजेदार बात देखिए, संतोष कांबले से पहले जो अधिकारी थे, उन्होंने इस अवैध पार्किंग के खिलाफ नोटिस थमाया और 1 लाख 8 हजार रुपये की पेनाल्टी (जुर्माना) भी ठोंकी थी। ये सारे कागजात और नोटिस चिल्ला-चिल्ला कर गवाही दे रहे हैं, लेकिन हमारे बी.एस. कटरे को कुछ दिखाई नहीं देता। शायद साहब के चश्मे का नंबर म्हाडा के नोटिसों को पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि दोषियों को ‘क्लीन चिट’ देने के लिए बना है!


फेडरेशन बंद, लेकिन ‘मौत का बोर्ड’ चालू है!

‘वशिष्ठ वाणी’ की खबरों और कोर्ट के डंडे के बाद फेडरेशन तो कानूनी रूप से दम तोड़ चुका है, लेकिन बालासाहेब भगत की रसूख की भूख शांत नहीं हुई। मुख्य रास्ते पर 300 किलो का भारी-भरकम लोहे का अवैध बोर्ड टांग दिया गया है। हवा के एक झोंके से यह बोर्ड पहले भी गिरकर एक मासूम बच्ची को लहूलुहान कर चुका है। लेकिन कटरे साहब की ऐसी ‘मेहरबानी’ है कि भगत ने जिद में आकर दोबारा उसी मौत के फंदे को वहीं लटका दिया। जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने पूछा कि दोबारा गिरा तो जिम्मेदारी किसकी? तो कटरे साहब कार्रवाई करने के बजाय उल्टा भड़क जाते हैं। साहब का सिद्धांत साफ है—“तुम न्यूज़ छापते रहो, हम सोते रहेंगे!”


महारथी नंबर 2: संतोष कांबले (उपाधि: ‘मैं क्या करूं? और नंबर ब्लॉक किंग’)

अब बात करते हैं म्हाडा के दूसरे ‘रत्न’ संतोष कांबले की। जब से ये गोरेगांव की कुर्सी पर विराजमान हुए हैं, मालवणी में अवैध पार्किंग उद्योग ने चौगुनी तरक्की कर ली है। जब कोई जागरूक नागरिक या मीडिया इनसे अवैध पार्किंग की शिकायत करता है, तो साहब बच्चों की तरह रोना रोते हुए दार्शनिक अंदाज में जवाब देते हैं—“अरे भाई, मालवणी में सब जगह अवैध पार्किंग है, तो मैं अकेले क्या करूं?” वाह साहब वाह!


15 साल पुराने वाटर टैंक पर ‘इवेंट स्पॉट’ का जादू!

कांबले साहब के इसी ‘ढीले रवैये’ से मालवणी की ओम सिद्धिविनायक सोसाइटी के सेक्रेटरी का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने म्हाडा के ब्लूप्रिंट की धज्जियां उड़ाते हुए 15 साल पुराने पानी के टैंक के ऊपर सीमेंट की पक्की छत डालकर ‘इवेंट स्पॉट’ (शहनाई हॉल) बना दिया! और इस महान काम के लिए फंड किसने दिया? मालवणी में अवैध निर्माणों को संरक्षण देने के लिए ‘विश्व प्रसिद्ध’ विधायक असलम शेख ने!


जब ‘वशिष्ठ वाणी’ की टीम ने म्हाडा के ब्लूप्रिंट के साथ संतोष कांबले को इस अवैध निर्माण का सच दिखाया, तो साहब ने ईमानदारी दिखाने के बजाय अकड़ते हुए कहा—“मैं मीडिया के कहने पर कुछ नहीं करूंगा!” और अपनी ‘महान’ प्रशासनिक क्षमता का परिचय देते हुए मीडिया का नंबर ही ब्लॉक कर दिया!


‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा कटाक्ष: जब रक्षक ही बन जाएं ‘ब्लॉक’ करने वाले दलाल!

हंसी भी आती है और तरस भी, कि मुंबई जैसी मायानगरी को सुधारने का जिम्मा ऐसे अधिकारियों के पास है जो सच का सामना होने पर फोन नंबर ब्लॉक करके छिप जाते हैं। संतोष कांबले, नंबर ब्लॉक करने से ‘वशिष्ठ वाणी’ की आवाज ब्लॉक नहीं होगी! और बी एस कटरे, आंखें मूंद लेने से वो 300 किलो का बोर्ड हवा में गायब नहीं हो जाएगा।

जब तक मालाड-गोरेगांव में ऐसे चापलूस और सुस्त अधिकारी कुर्सियों पर चिपक कर सिर्फ नेताओं के फोन का इंतजार करेंगे, तब तक आम जनता को न्याय मिलना तो दूर, अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो जाएगा। ‘वशिष्ठ वाणी’ इन दोनों महारथियों के कारनामों को उजागर करती रहेगी, चाहे ये कितने भी नंबर ब्लॉक कर लें या कितनी भी गहरी नींद सो लें!

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