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गोरेगांव डिप्टी कलेक्टर पाडवी की ‘कथनी और करनी’ का पर्दाफाश; MLA के रसूख के आगे बीएमसी का हथौड़ा पड़ा ठंडा, पीड़ित नेहा वालावलकर अब भी इंसाफ को तरसी!

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई के प्रशासनिक गलियारों में बैठे अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं या नेताओं की चापलूसी करने के लिए? यह शर्मनाक सच आज ‘वशिष्ठ वाणी’ के इस महा-खुलासे से जनता के सामने आ चुका है। मामला मालाड (पश्चिम) के एरंगळ विलेज का है, जहां सरकारी सिस्टम के भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के कारण एक बेकसूर महिला का हक सरेआम कुचला जा रहा है। गोरेगांव के डिप्टी कलेक्टर (उपजिलाधिकारी) विनायक पाडवी जो खुद को एक ‘इमानदार’ अधिकारी के रूप में पेश कर रहे थे, उनका असली चेहरा और खोखले वादे अब बेनकाब हो चुके हैं।

दबंगों के लिए आया ‘माननीय’ का फोन और रफूचक्कर हो गया प्रशासन!

पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा है, लेकिन यह हकीकत है। योगाश्रम, बुल्लर गार्डन, एरंगळ विलेज, दाणापाणी, मालाड (प.), मुंबई-400061 में रहने वाली पीड़ित नेहा निलेश वालावलकर को न्याय दिलाने के लिए ‘वशिष्ठ वाणी’ ने 3 जून को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर का असर ऐसा हुआ कि 4 जून को डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी भारी बल और बीएमसी (BMC) के दस्ते के साथ खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंच गए। पाडवी साहब ने खुद ‘वशिष्ठ वाणी’ को फोन करके बड़बोलेपन में कहा था—“मैं मौके पर पहुंच चुका हूँ, बीएमसी अधिकारियों का इंतजार है, आज रास्ते की यह अवैध दीवार तोड़कर ही जाऊंगा और ‘वशिष्ठ वाणी’ को इसका सबूत (तस्वीरें) भी भेजूंगा।”

लेकिन तभी पर्दे के पीछे असली खेल शुरू हुआ! सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, रास्ता बंद करने वाले दबंगों को बचाने के लिए स्थानीय विधायक असलम शेख का फोन खड़क गया। ‘माननीय’ का फोन आते ही डिप्टी कलेक्टर के पैर कांपने लगे और बीएमसी का जो दस्ता हथौड़ा लेकर दीवार तोड़ने आया था, वह दुम दबाकर चुपचाप वापस लौट गया।

‘वशिष्ठ वाणी’ के तीखे सवाल पर मानसून का ‘कायरतापूर्ण’ बहाना!

जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने विनायक पाडवी से इस यू-टर्न पर सीधा सवाल किया, तो साहब ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए ‘मानसून’ (बारिश) का बहाना बनाना शुरू कर दिया।

‘वशिष्ठ वाणी’ का सीधा काउंटर सवाल: पाडवी साहब! जब आप दलबल और हथौड़ा लेकर आए थे, तब क्या आपको मुंबई के मानसून का ध्यान नहीं था? क्या नेताओं के फोन आने के बाद ही आपको बारिश की याद आई?

अपनी किरकिरी होते देख डिप्टी कलेक्टर पाडवी ने नया पैंतरा बदला और कहा कि उन्होंने रास्ता बंद करने वालों को 2 दिन (48 घंटे) का समय दिया है, अगर वे खुद रास्ता नहीं खोलते तो बीएमसी रास्ता खोलेगी। लेकिन आज 3 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, पाडवी साहब के दफ्तर में रहस्यमयी सन्नाटा पसरा है और प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह ठंडे बस्ते में जा चुकी है।

खुले लटकते तार और यमराज बनता रास्ता: हादसे की जिम्मेदारी किसकी?

नेताओं की दलाली और अधिकारियों की सुस्ती के बीच पीड़ित परिवार की जिंदगी दांव पर लग गई है। दबंगों ने मुख्य रास्ता ब्लॉक करके जो वैकल्पिक रास्ता दिया है, वह इतना संकरा और पतला है कि वहां से गुजरना भी दूभर है। सबसे भयानक बात यह है कि उस पतले रास्ते पर बिजली के खुले तार लटक रहे हैं

अब जब मुंबई में मानसून दस्तक दे चुका है, कड़कती बिजली और मूसलाधार बारिश के बीच अगर उस पीड़ित महिला को कुछ भी अनहोनी होती है या करंट लगता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नेताओं की दलाली में व्यस्त रहने वाले विधायक असलम शेख लेंगे या अपनी कुर्सी बचाने में जुटे डिप्टी कलेक्टर विनायक पाडवी?

मालाड के विकास पर असलम शेख का ‘ग्रहण’

सच्चाई तो यह है कि मालाड और गोरेगांव के इलाकों में बैठे अधिकतर सरकारी अधिकारी जनसेवा कम और नेताओं की जी-हुजूरी ज्यादा करते हैं। रही बात विधायक असलम शेख की, तो क्षेत्र में विकास कार्य तो कभी नजर नहीं आते, लेकिन जब भी कोई अधिकारी अच्छा काम करने जाता है, तो या तो खुद असलम शेख का या फिर उनके बेटे का फोन आ जाता है। जब मालाड में ऐसे जनप्रतिनिधि बैठे हों, तो आम जनता को न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

‘वशिष्ठ वाणी’ इस प्रशासनिक और राजनीतिक नंगे नाच को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगी। हम इस मामले को अंजाम तक पहुंचाएंगे और जब तक पीड़ित नेहा वालावलकर को उनका हक और वैध रास्ता नहीं मिल जाता, तब तक भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ हमारी यह खोजी रिपोर्टिंग जारी रहेगी!

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