मुंबई: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, जहां एक तरफ आप डिजिटल इंडिया, पारदर्शिता और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा देते हैं, वहीं आपके ही नेतृत्व वाले गठबंधन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी ज़मीनी हकीकत से आँखें मूंदे बैठे हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ (Vashishtha Vani) पिछले कई दिनों से लगातार इस गंभीर मुद्दे पर खबरें प्रकाशित कर रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में बैठी सरकार और अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
मामला कांदिवली के एकता नगर रोड (Ekta Nagar Road) का है, जहां नियमों और जनसुरक्षा की धज्जियां उड़ाते हुए ‘भारत गैस एजेंसी’ ने घनी आबादी के बीच अपना गोदाम बना दिया है।
बड़ी आबादी के बीच ‘बारूद का ढेर’, हादसा हुआ तो कौन लेगा ज़िम्मेदारी?

जिस एकता नगर रोड पर यह गैस गोदाम संचालित किया जा रहा है, वहाँ बहुत बड़ी संख्या में आम परिवार रहते हैं। छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रोज़ाना इसी रास्ते से गुज़रते हैं। गैस सिलेंडरों से भरा यह गोदाम किसी बड़े ‘टाइम बम’ से कम नहीं है।
यदि यहाँ ज़रा सी भी चूक, लापरवाही या कोई अनहोनी हरकत होती है, तो होने वाले भयानक परिणाम की सोचकर ही दिल दहल जाता है। इसके बावजूद, सिस्टम में बैठे ज़िम्मेदार मंत्री और अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।
ना सुन रहा कांदिवली RTO, ना CM फडणवीस को परवाह!
‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- कांदिवली RTO के अधिकारी: व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही और सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों को ठेंगा दिखाने वाली इस गतिविधि पर आरटीओ (RTO) के अधिकारी पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस: राज्य के मुखिया और गृह विभाग संभालने वाले मुख्यमंत्री भी इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
जनता का सवाल- क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?
आज एकता नगर की बेबस जनता खुद को ‘राम भरोसे’ महसूस कर रही है। अधिकारियों और मंत्रियों की यह साठगांठ और चुप्पी यह साफ बयां करती है कि उनके लिए आम नागरिकों की जान की कीमत मंत्रियों की कुर्सियों और निजी हितों से बढ़कर नहीं है।
अब देखना यह है कि क्या इस रिपोर्ट के बाद खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या महाराष्ट्र का शीर्ष नेतृत्व इस ‘बारूद के ढेर’ को आबादी के बीच से हटाने का साहस दिखाता है, या फिर अधिकारियों का यह मौन किसी बड़ी तबाही को न्योता देता रहेगा।










