मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी में हादसे को न्यौता दे रहा अवैध बोर्ड; म्हाडा अधिकारी की ‘मेहरबानी’ या गहरी नींद?
मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मालड वेस्ट के मालवणी गेट नंबर 8 स्थित स्वप्नपूर्ति कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी और बंद हो चुके फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। लेकिन सबसे बड़ा और गंभीर सवाल म्हाडा (MHADA) के उपनिबंधक बी.एस. कटरे पर खड़ा हो रहा है। आखिर ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार सबूतों के साथ आगाह किए जाने के बाद भी म्हाडा प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या म्हाडा अधिकारियों ने कसम खा ली है कि वे जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर सिर्फ आरोपियों को बचाएंगे?
मासूम बच्ची को घायल कर चुका है ‘मौत का बोर्ड’, फिर भी वही जिद!

सोसाइटी के मुख्य रास्ते पर नियमों को ताक पर रखकर 200 से 300 किलोग्राम भारी-भरकम लोहे का बोर्ड टांग दिया गया है। स्थानीय जनता इस बात की गवाह है कि यह भारी बोर्ड पहले भी एक बार गिर चुका है, जिसकी चपेट में आने से एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से चोटिल (घायल) हो गई थी। इस हादसे के बाद भी म्हाडा प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा। अपनी जिद और रसूख के नशे में डूबे फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत ने मासूम की जान की परवाह किए बिना, दोबारा उसी खतरनाक बोर्ड को उसी जगह पर टांग दिया।
बड़ा सवाल: जब फेडरेशन कानूनी रूप से बंद हो चुका है, तो उस बंद हो चुके फेडरेशन के नाम का बोर्ड मुख्य सड़क पर चमकाकर किसे डराने की कोशिश की जा रही है? और म्हाडा के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बनकर इस तमाशे को क्यों देख रहे हैं?
शिकायतों का अंबार, फिर भी कटरे साहब की ‘रहमोकरम’ क्यों?
पिछले 5 सालों में मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी और फेडरेशन के तथाकथित अध्यक्ष के खिलाफ रूम मालिकों ने शिकायतों की झड़ी लगा दी है। आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि किसी भी ईमानदार कार्रवाई के लिए काफी है:
- आपातकालीन रास्तों पर डाका: सोसाइटी के इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन रास्तों) को ब्लॉक कर वहां अवैध पार्किंग का धंधा चलाया जा रहा है।
- वाहन मालिकों से अवैध वसूली: निर्दोष वाहन मालिकों को धोखे में रखकर सालों तक पार्किंग के नाम पर मोटी रकम वसूली गई।
- पद का दुरुपयोग और रूम दलाली: सोसाइटी और फेडरेशन के ऊंचे पदों पर बैठकर खुलेआम रूम दलाली और अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इन अनगिनत गंभीर शिकायतों के बाद भी उपनिबंधक बी.एस. कटरे के दफ्तर से कोई ठोस कार्रवाई न होना यह साफ इशारा करता है कि म्हाडा के अधिकारी नियमों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों को ‘कवच’ देने के लिए बैठे हैं।
प्रशासन को ‘वशिष्ठ वाणी’ की खुली चेतावनी
जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले इन तथाकथित कप्तानों और अपनी आंखें मूंदकर बैठे म्हाडा अधिकारियों को ‘वशिष्ठ वाणी’ यह साफ कर देना चाहती है कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक उस अवैध और खतरनाक बोर्ड को हटाया नहीं जाता और भ्रष्ट तंत्र पर ताला नहीं लगता। अगर इस लापरवाही के कारण कल को कोई जनहानि या बड़ा हादसा होता है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी म्हाडा उपनिबंधक बी.एस. कटरे और इस अवैध निर्माण को सह देने वाले अध्यक्ष की होगी।
अब देखना यह है कि इस तीखी रिपोर्ट के बाद भी म्हाडा अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर किसी बेकसूर की जान जाने का इंतजार करता है!













