मुंबई: क्या मुंबई की सड़कों पर महिला अधिकारियों की इज्जत इतनी सस्ती हो गई है कि कोई भी ऐरा-गैरा उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की कोशिश कर ले? मलाड (पश्चिम) के लिबर्टी गार्डन इलाके से जो खबर आई है, वह न केवल चौंकाने वाली है बल्कि मुंबई पुलिस और आरटीओ प्रशासन के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
गुंडागर्दी का नंगा नाच: सरेआम महिला पर हाथ उठाने की कोशिश
लिबर्टी गार्डन बीएमसी ऑफिस के बाहर जब एक महिला ट्रैफिक अधिकारी पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रही थी, तब एक दबंग ऑटो रिक्शा चालक ने सारी हदें पार कर दीं।
- भद्दी गालियाँ: अधिकारी के मना करने पर चालक ने ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिसे सुना भी नहीं जा सकता।
- हिंसा का प्रयास: चालक बार-बार महिला अधिकारी को मारने के लिए झपटा। अगर वहां मौजूद जागरूक नागरिक उसे नहीं रोकते, तो आज तस्वीर कुछ और ही होती।
वशिष्ठ वाणी का सवाल: ट्वीट के बाद भी साहबों की नींद क्यों नहीं खुली?
इस पूरी घटना के बाद वशिष्ठ वाणी ने तुरंत मुंबई आरटीओ और मुंबई पुलिस को टैग करते हुए ट्वीट किया। लेकिन अफ़सोस! वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे शायद ‘मामूली’ घटना समझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
साहब! यह सिर्फ एक महिला का अपमान नहीं है, यह उस वर्दी का अपमान है जिसे पहनकर वह धूप में आपकी व्यवस्था संभाल रही है। मलाड ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों की चुप्पी यह दर्शाती है कि उन्हें अपने विभाग की महिला कर्मियों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है। उन्हें बस जनता की गालियां सुनने के लिए सड़क पर छोड़ दिया गया है।
वशिष्ठ वाणी की सीधी चेतावनी:
हम प्रशासन से पूछते हैं— क्या आप किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हैं? * उस ऑटो चालक को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।
- उसका परमिट और लाइसेंस जीवनभर के लिए रद्द किया जाए ताकि दूसरों को सबक मिले।
- यदि २४ घंटे के भीतर FIR और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन खुद ऐसी गुंडागर्दी को शह दे रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों, अपनी कुर्सियों से उठिए और महिला शक्ति का सम्मान करना सीखिए!












