मालाड (पश्चिम): न्यू लिंक रोड पर स्थित Modi Hyundai शोरूम द्वारा फुटपाथ पर किया गया अतिक्रमण अब एक गंभीर चुनौती बन चुका है। वशिष्ठ वाणी द्वारा इस विषय को निरंतर उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में तो आया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रशासनिक विफलता की पराकाष्ठा:
हैरानी की बात यह है कि वशिष्ठ वाणी की शिकायतों के बाद आर.टी.ओ. (RTO) और ट्रैफिक विभाग द्वारा बार-बार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद, Modi Motors के प्रबंधन पर इसका कोई स्थायी प्रभाव नहीं दिख रहा। अधिकारियों की टीम के जाते ही फुटपाथ पुनः शोरूम की निजी पार्किंग में तब्दील हो जाता है, जो सीधे तौर पर नियमों की अवहेलना है।
आर.टी.ओ. और संबंधित अधिकारियों से सीधे प्रश्न:
जब कार्रवाई के बाद भी सुधार न हो, तो प्रश्न व्यवस्था की कार्यक्षमता पर उठना स्वाभाविक है:
- असरहीन कार्रवाई का औचित्य?: जब वशिष्ठ वाणी लगातार सबूत पेश कर रहा है और विभाग कार्रवाई कर रहा है, तो वह कार्रवाई इतनी “कमजोर” क्यों है कि शोरूम प्रबंधन उसे नजरअंदाज करने का साहस जुटा पा रहा है?
- कानून का इकबाल कहाँ है?: क्या एक निजी शोरूम का व्यावसायिक हित सार्वजनिक सुरक्षा से बड़ा है? आर.टी.ओ. द्वारा की जा रही कार्रवाई का भय उल्लंघनकर्ताओं के मन में क्यों नहीं बैठ रहा?
- क्या ‘जुर्माना’ ही काफी है?: बार-बार होने वाले इस उल्लंघन के लिए केवल आर्थिक दंड (Fine) पर्याप्त नहीं लग रहा। क्या विभाग शोरूम के ट्रेड लाइसेंस या व्यावसायिक अनुमति पर कड़े कदम उठाने पर विचार करेगा?
- जनता की निरंतर अनदेखी: व्यस्त न्यू लिंक रोड पर पैदल यात्रियों को फुटपाथ न मिलने के कारण सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है। क्या प्रशासन किसी अनहोनी का प्रतीक्षा कर रहा है?
- जवाबदेही किसकी?: वशिष्ठ वाणी की सक्रियता के उपरांत भी यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल रहा, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी?
निष्कर्ष:
सार्वजनिक फुटपाथ पर Modi Hyundai का नियंत्रण और विभाग की बेअसर कार्रवाई ने शासन व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वशिष्ठ वाणी इस मुद्दे पर तब तक अडिग रहेगा जब तक प्रशासन केवल औपचारिकता छोड़कर फुटपाथ को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त नहीं करा देता।












