मुंबई: ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार 4 दिनों से लिंक रोड की बदहाली और अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। मुंबई RTO ने ट्विटर पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि शिकायत गोरेगांव ट्रैफिक विभाग को भेज दी गई है, लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है।
कागजों पर कार्रवाई, सड़क पर वही पुरानी तस्वीर
RTO के दावों की हवा तब निकल गई जब आज भी जैन सुबकुछ (Jain Subkuch) के ठीक बाहर फुटपाथ पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं। सवाल यह उठता है कि अगर शिकायत पर कार्रवाई हुई, तो ये गाड़ियां वहाँ से हटी क्यों नहीं? क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ ईमेल और मैसेज भेजने तक ही सीमित है?
रसूखदारों के आगे बेबस प्रशासन?
जिस तरह से एक प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान के बाहर फुटपाथ पर अवैध पार्किंग जारी है, उससे अब आम जनता के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और रसूखदारों के बीच कोई गुप्त समझौता (Deal) हो चुका है? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, लेकिन यहाँ पैदल चलने वालों के हक को रसूख की गाड़ियों तले कुचला जा रहा है।
जनता की जान जोखिम में
प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि आम नागरिकों को अभी भी जान जोखिम में डालकर ऑटो पकड़ने के लिए सड़क के बीचों-बीच खड़ा होना पड़ रहा है। फुटपाथों पर अवैध कब्जा और सड़क के किनारों पर गाड़ियों का जमावड़ा न केवल यातायात बाधित कर रहा है, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना को भी दावत दे रहा है।
वशिष्ठ वाणी की चेतावनी: “अगर प्रशासन ने केवल खानापूर्ति की और जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा, तो यह लड़ाई और तेज होगी। जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
मुंबई RTO और ट्रैफिक पुलिस से सीधे सवाल:
- शिकायत ‘फॉरवर्ड’ करने के बाद गोरेगांव विभाग ने अब तक कितनी गाड़ियों पर कार्रवाई की?
- क्या जैन सुबकुछ के बाहर का फुटपाथ कभी अतिक्रमण मुक्त होगा?
- क्या किसी बेगुनाह की जान जाने के बाद ही प्रशासन हरकत में आएगा?
मुंबई RTO, अब बहानेबाजी छोड़िए और ठोस कार्रवाई करके दिखाइए!











