कांदिवली (मुंबई): वशिष्ठ वाणी की ग्राउंड रिपोर्ट आज कांदिवली ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर रही है। इलाके की मुख्य सड़कों और सिग्नलों की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे किसी भी सभ्य शहर के लिए शर्मनाक हैं। यहाँ कानून का डर खत्म हो चुका है और सड़कों को निजी संपत्ति समझ लिया गया है।
📸 ग्राउंड रिपोर्ट: सिग्नलों और सड़कों की बदहाली
1. चारकोप सिग्नल (Charkop Signal):

पहली तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि चारकोप सिग्नल के पास वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। यह कोई ट्रैफिक जाम नहीं, बल्कि ‘लाइन पार्किंग’ है। व्यस्त सिग्नल पर गाड़ियां खड़ी होने से पीछे आने वाले ट्रैफिक को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
2. चारकोप पेट्रोल पंप (Charkop Petrol Pump):
दूसरी तस्वीर पेट्रोल पंप के पास की है। यहाँ वाहनों का जमावड़ा इस कदर बढ़ गया है कि पेट्रोल भरवाने आने वाले वाहनों को भी जगह नहीं मिलती। सड़क का एक बड़ा हिस्सा इन अवैध गाड़ियों ने निगल लिया है।

3. एकता नगर सिग्नल—गैराज में तब्दील (Ekta Nagar Signal):

सबसे चौंकाने वाली तस्वीर एकता नगर सिग्नल की है। यहाँ ऑटो मैकेनिकों ने सिग्नल को ही अपना ‘ओपन गैराज’ बना लिया है। बीच सड़क पर गाड़ियां ठीक की जा रही हैं, जिससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों के लिए रास्ता ही नहीं बचा है। क्या प्रशासन ने सिग्नल को गैराज चलाने का लाइसेंस दे दिया है?
⚠️ सतीश राउत के कार्यकाल पर उठते सवाल
स्थानीय जनता का आरोप है कि जब से कांदिवली ट्रैफिक विभाग में सतीश राउत आए हैं, तब से इलाके में अवैध पार्किंग और अतिक्रमण चरम पर है।
- क्या सतीश राउत जानबूझकर इन मैकेनिकों और अवैध पार्किंग माफियाओं को बढ़ावा दे रहे हैं?
- आखिर क्यों वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं?
📢 वशिष्ठ वाणी के तीखे सवाल:
- सिग्नल पर गैराज: क्या ट्रैफिक पुलिस को सिग्नल पर गाड़ियां ठीक करते मैकेनिक दिखाई नहीं देते?
- प्रशासनिक ढिलाई: सतीश राउत सड़कों को खाली करवाने में नाकाम क्यों साबित हो रहे हैं?
- जनता की सुरक्षा: अवैध पार्किंग के कारण अगर कोई एक्सीडेंट होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
निष्कर्ष: अगर कांदिवली ट्रैफिक विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों ने जल्द ही सतीश राउत की जवाबदेही तय नहीं की और इन सड़कों को मुक्त नहीं कराया, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।













