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मालाड का ‘कोयला’ और सांसद की चुप्पी: 20 दिन बाद भी पीयूष गोयल के ‘विकास’ के रडार से बाहर क्यों है भू-माफिया?

मुंबई (मालाड): राजनीति में ‘मौन’ कभी-कभी स्वीकृति का पर्याय बन जाता है। मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में फल-फूल रहा अवैध निर्माण आज उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल की साख पर कालिख पोत रहा है। 20 दिन बीत चुके हैं—न कोई हथौड़ा चला, न कोई बयान आया। ऐसा लगता है जैसे दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचने वाली आवाज, अपने ही संसदीय क्षेत्र की गलियों में दम तोड़ रही है।

गोयल साहब, क्या ये ‘कर्सन’ आपके कद से भी बड़ा है?

पीयूष गोयल जी, आप देश के कद्दावर नेता हैं, लेकिन क्या मालाड का एक मामूली भू-माफिया ‘कर्सन’ इतना रसूखदार है कि आपका प्रशासन उसके सामने नतमस्तक है?

  • 20 दिनों का सन्नाटा क्या यह संदेश दे रहा है कि ‘अवैध’ को अब ‘अभय’ मिल चुका है?
  • जिस रेलवे सुरक्षा की आप दुहाई देते थे, उसी ट्रैक के बगल में खड़ी यह अवैध इमारत आपके ‘सुरक्षित मुंबई’ के दावों का मखौल उड़ा रही है।

बीएमसी का ‘अंधा’ प्रेम और आपका आशीर्वाद?

सहायक आयुक्त कुंदन वळवी और उनका विभाग पिछले एक साल से (21 मई 2025 के नोटिस के बाद) गहरी नींद में है। सवाल यह है कि इस कुंभकर्णी नींद की लोरी कौन गा रहा है? जनता पूछ रही है—क्या इन भ्रष्ट अधिकारियों को सांसद महोदय का वरदहस्त प्राप्त है? अगर नहीं, तो 20 दिनों की मीडिया रिपोर्टिंग के बाद भी प्रशासन की कलम की स्याही क्यों सूखी हुई है?


“एक पूर्व रेल मंत्री के क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास अवैध निर्माण होना वैसी ही विडंबना है, जैसे चिराग के नीचे अंधेरा होना। गोयल जी, जनता ने आपको वोट ‘मौन व्रत’ धारण करने के लिए नहीं दिया था।”

‘वशिष्ठ वाणी’ के सीधे सवाल, जिनका जवाब गायब है:

  1. सांसद जी, क्या आपकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति केवल चुनावी रैलियों तक सीमित है?
  2. 20 दिनों से मीडिया चिल्ला रहा है, क्या आपके जनसंपर्क कार्यालय तक इसकी गूँज नहीं पहुँची?
  3. क्या रेलवे और जनता की सुरक्षा से ऊपर किसी माफिया का आर्थिक हित है?

निष्कर्ष: कार्रवाई या सिर्फ कागजी राजनीति?

पीयूष गोयल जी, मालाड की जनता तमाशा देख रही है। यह अवैध निर्माण सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि आपकी कार्यक्षमता को दी गई चुनौती है। ‘वशिष्ठ वाणी’ तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक ‘कोयला वाली गली’ का यह काला सच जमींदोज नहीं हो जाता। अब फैसला आपका है—आप जनता के साथ खड़े हैं या माफिया के ‘कवच’ के साथ?

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