मुंबई, मालाड (पश्चिम): क्या मालाड के वार्ड 35 में कानून का राज खत्म हो चुका है? क्या यहाँ की गलियां अब नगर निगम के अधिकारियों और भू-माफियाओं की जागीर बन गई हैं? ‘वशिष्ठ वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में आज हम उस कड़वे सच से पर्दा उठाएंगे, जिसे मालाड के रसूखदार नेता और सुस्त अधिकारी दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुंदन वळवी का ‘संरक्षण’ और कर्सन का ‘साम्राज्य’
मालाड के भदरण नगर की ‘कोयला वाली गली’ आज भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है। रेलवे ट्रैक जैसी संवेदनशील जगह के पास नियमों को पैरों तले रौंदकर भू-माफिया कर्सन ने अवैध निर्माण खड़ा कर दिया है।

- रिकॉर्ड पर सवाल: जब BMC ने 21 मई 2025 को इस अवैध निर्माण के खिलाफ आधिकारिक नोटिस जारी किया था, तो साल भर बाद भी कार्रवाई की फाइल क्यों दबी हुई है?
- अधिकारी की भूमिका: BMC अधिकारी कुंदन वळवी की चुप्पी अब सवाल नहीं, बल्कि सीधा आरोप है। क्या वळवी को भू-माफिया का डर है या फिर ‘मलाई’ का असर?

सांसद पीयूष गोयल: संसद में दहाड़, पर मालाड में चुप्पी क्यों?
मालाड की जनता ने जिसे अपना प्रतिनिधि चुनकर दिल्ली भेजा, आज वो जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सांसद पीयूष गोयल के पास क्या इतना भी समय नहीं कि वे अपने ही संसदीय क्षेत्र में हो रहे इस गंभीर घोटाले पर संज्ञान ले सकें?
“वोट के समय सक्रिय रहने वाले नेता, आज भू-माफिया के आगे नतमस्तक हैं। नगरसेवक से लेकर सांसद तक, सब ‘धृतराष्ट्र’ बने बैठे हैं और मालाड के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ हो रहा है।”
कमिश्नर अश्विनी भिड़े के लिए ‘अग्निपरीक्षा’
यह मामला अब केवल एक अवैध निर्माण का नहीं रहा, बल्कि BMC की साख का है।
- क्या कमिश्नर अश्विनी भिड़े अधिकारी कुंदन वळवी की संपत्ति और उनकी माफिया से सांठगांठ की जांच कराएंगी?
- क्या रेलवे सुरक्षा को ताक पर रखने वाले इस निर्माण को जमींदोज किया जाएगा?
- क्या मंत्रालयों में बैठे आकाओं के दबाव को दरकिनार कर कमिश्नर कोई सख्त आदेश देंगी?
निष्कर्ष: अब जागने का वक्त है!
मालाड की जनता देख रही है कि कौन उनके हक के लिए लड़ रहा है और कौन माफिया के साथ ‘सेटिंग’ में व्यस्त है। वशिष्ठ वाणी अपनी इस मुहिम को तब तक नहीं रोकेगा, जब तक भ्रष्ट अधिकारी कुंदन वळवी और भू-माफिया कर्सन के इस अपवित्र गठबंधन का अंत नहीं हो जाता।













