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बेशर्मी की हद: BMC अधिकारी कुंदन वळवी को न कानून का डर, न मीडिया का खौफ! ‘कोयला वाली गली’ में बिक चुका है सिस्टम?

मुंबई, मालाड (विशेष रिपोर्ट): कहते हैं कि सत्ता का नशा और माफिया का पैसा जब मिल जाता है, तो कानून अंधा नहीं, बल्कि अपाहिज हो जाता है। मालाड (वार्ड 35) में कुछ ऐसा ही हो रहा है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार खुलासे किए जाने के बावजूद, BMC अधिकारी कुंदन वळवी की कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ऐसा लगता है कि वाल्वी ने यह मान लिया है कि वे संविधान से ऊपर हैं और उनकी कुर्सी जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि भू-माफिया कर्सन के साम्राज्य को बचाने के लिए है।


खबर का असर क्यों नहीं? क्या ऊपर तक पहुंचता है हिस्सा?

भदरण नगर की ‘कोयला वाली गली’ में रेलवे ट्रैक के पास नियमों को ताक पर रखकर जो अवैध निर्माण खड़ा किया गया है, उसकी गूंज अब मंत्रालयों तक पहुंच रही है। लेकिन कुंदन वळवी जैसे अधिकारी इसे ‘नजरअंदाज’ करने की कसम खा चुके हैं।


अब सवाल बड़े अधिकारियों पर भी है:

  • क्या BMC कमिश्नर को अपने मातहत अधिकारियों की इस खुली दबंगई की खबर नहीं है?
  • क्या BMC मेयर और प्रशासन के वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग कुंदन वळवी को संरक्षण दे रहे हैं?
  • क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी?

जनता के टैक्स पर पल रहे अधिकारी, माफिया के आगे नतमस्तक

एक तरफ प्रशासन दावा करता है कि वह डिजिटल और पारदर्शी हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ कुंदन वळवी जैसे अधिकारी लिखित शिकायतों और प्रेस रिपोर्ट्स को कूड़े के ढेर में फेंक रहे हैं। जब रक्षक ही भक्षक (भू-माफिया) के साथ चाय की चुस्कियां लेने लगे, तो आम जनता किसके पास जाए?

वशिष्ठ वाणी की दहाड़: “हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक ‘कोयला वाली गली’ का काला साम्राज्य जमींदोज नहीं हो जाता। अधिकारी कुंदन वळवी की चुप्पी यह साबित कर रही है कि वे अपनी ड्यूटी के प्रति नहीं, बल्कि माफिया के प्रति वफादार हैं।”

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