क्षेत्र में रबी की फसलें पकने के दौरान मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। तेज हवाओं और बूंदाबांदी के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में मौसम का मिजाज बार-बार बदल रहा है। कभी तेज हवा के साथ आंधी चल रही है, तो कभी तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है। दो दिन पहले क्षेत्र में तेज बूंदाबांदी और बारिश भी हुई थी। रबी की फसलें अब कटाई के लिए तैयार हैं, जिससे बदलते मौसम से नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
आंधी और बूंदाबांदी से जीरा, रायड़ा और ईसबगोल जैसी रबी की फसलों को विशेष रूप से नुकसान हुआ है। जीरे की अगेती फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। तेज हवा के झोंकों और अंधड़ के कारण पकी हुई ईसबगोल की फसल के सिट्टों से बीज जमीन पर बिखर गए हैं। गेहूं, जीरा और रायड़ा की फसलों को भी क्षति पहुंची है।
क्षेत्र के किसान नेता महावीरसिंह सनावड़ा, रणवीरसिंह भाटी, आईदान सिंह, जयप्रकाश देवड़ा, भंवरलाल पंवार और मुख्तियार खां, आवड़ भील सहित अन्य किसानों ने बताया कि आसमान में बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं का दौर जारी है। किसान दिन-रात जीरे और ईसबगोल की फसलों की कटाई कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि संभावित बारिश से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।














