मुंबई/वशिष्ठ वाणी। मुंबई के मालवणी क्षेत्र के सामना नगर, गेट नंबर 8 में स्थित कई म्हाडा सोसायटियों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय निवासियों और कुछ सोसायटी सदस्यों का आरोप है कि म्हाडा मुंबई क्षेत्र निर्माण गोरेगांव के कुछ अधिकारियों की कथित मेहरबानी के कारण फेडरेशन और सोसायटी पदाधिकारियों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है।
इस पूरे मामले में विशेष रूप से म्हाडा अधिकारी रोहित शिंदे (Rohit Shinde) की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ सोसायटियों के अध्यक्षों और फेडरेशन के पदाधिकारियों को संरक्षण मिलने के कारण क्षेत्र में अवैध निर्माण और अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
फेडरेशन पर कार्रवाई अधूरी क्यों?
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. अब्दुल कलाम फेडरेशन के अध्यक्ष और सचिव पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में कई बिल्डिंगों की हालत खराब हो गई है और उचित रखरखाव के अभाव में संरचनात्मक स्थिति भी प्रभावित हुई है।
सूत्रों के अनुसार, मीडिया में मामला उठने के बाद म्हाडा की ओर से फेडरेशन को नोटिस जारी किया गया था। हालांकि आरोप यह भी है कि जब कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पड़ी, तब मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
निवासियों का कहना है कि नोटिस जारी करने के बाद भी यदि ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो इससे यह संदेश जाता है कि प्रशासनिक कार्रवाई केवल औपचारिकता भर है।

अवैध गार्डन निर्माण का आरोप
मालवणी की ओम सिद्धविनायक सोसायटी को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि सोसायटी के अध्यक्ष और सचिव ने एक ऐसे स्थान पर गार्डन का निर्माण कर दिया, जिसे स्थानीय लोग अवैध बता रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि संबंधित सोसायटी को पहले से ही म्हाडा द्वारा दो बड़े गार्डन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद नए स्थान पर गार्डन बनाए जाने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसकी आवश्यकता क्या थी और अनुमति किस आधार पर दी गई।
सरकारी फंड और मंजूरी पर उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस गार्डन निर्माण के लिए सरकारी फंड उपलब्ध कराया गया, जिसके संबंध में विधायक असलम शेख का नाम भी चर्चा में आया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित कार्य को म्हाडा स्तर पर भी मौन स्वीकृति मिल गई।
हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक सामने नहीं आया है।

अवैध निर्माण के आरोप
ओम सिद्धविनायक सोसायटी के सचिव पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सोसायटी परिसर में कई अवैध निर्माण कराए हैं। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इन निर्माणों से संबंधित दस्तावेज़ और तस्वीरें अधिकारियों को भी सौंपे गए हैं।
इसके बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिकायतों का क्या होता है और उनका निष्पक्ष मूल्यांकन कैसे किया जाता है।

खाली जगह पर अवैध पार्किंग और वसूली का आरोप
मालवणी के इसी क्षेत्र में एक अन्य विवाद भी सामने आया है। आरोप है कि म्हाडा की खाली जमीन को निजी बताकर अवैध पार्किंग चलाई गई, और कई वर्षों तक वाहन मालिकों से पार्किंग शुल्क वसूला गया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों तक भी पहुंचाई गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
मीडिया के सवालों से दूरी क्यों?
इस विषय पर जब संसद वाणी और वशिष्ठ वाणी समाचार पत्र के संवाददाताओं ने संबंधित अधिकारी रोहित शिंदे से सवाल पूछने की कोशिश की, तो कथित तौर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार ऐसा भी हुआ कि मीडिया द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद संबंधित पदाधिकारियों को इसकी जानकारी पहले ही मिल जाती थी।
यदि ऐसा है, तो यह स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिकायतें और कार्रवाई के बीच दूरी
निवासियों का यह भी आरोप है कि केवल म्हाडा ही नहीं, बल्कि उपनिबंधक कार्यालय में की गई कई शिकायतें भी आगे नहीं बढ़ पातीं और फाइलों में दबकर रह जाती हैं।
ऐसे में स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—
क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है?
या फिर सिस्टम में कहीं न कहीं ऐसी खामियां हैं, जिनके कारण शिकायतों का समाधान नहीं हो पाता?
जांच की मांग
मालवणी क्षेत्र के कई नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अवैध निर्माण, पार्किंग और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।
क्योंकि जब सवाल उठते हैं और जवाब नहीं मिलते, तो संदेह और भी गहरा हो जाता है।








