विशेष जांच रिपोर्ट (कांदिवली/मुंबई): मुंबई की व्यस्त सड़कों पर आम जनता के लिए चलना जहां दिन-ब-दिन दूभर होता जा रहा है, वहीं कांदिवली पश्चिम में रसूखदारों और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत का एक शर्मनाक नमूना सामने आया है। रेनॉल्ट कांदिवली शोरूम (शॉप नं. 1 और 2, पुनीता अपार्टमेंट्स, स्वामी विवेकानंद रोड, मजीठिया नगर के सामने, भद्रन नगर, कांदिवली वेस्ट) के बाहर की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि जब ट्रैफिक विभाग, बीएमसी और स्थानीय पुलिस का ‘आशीर्वाद’ प्राप्त हो, तो नियमों की धज्जियां उड़ाना कितना आसान हो जाता है।
सड़क को बना दिया ‘निजी पार्किंग’
तस्वीरों और जमीनी हकीकत से यह साफ जाहिर है कि रेनॉल्ट शोरूम प्रबंधन ने सार्वजनिक एसवी रोड (SV Road) को ही अपना निजी पार्किंग यार्ड बना लिया है। 24 घंटे नई-पुरानी गाड़ियां सड़क पर बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं। जिस सड़क पर लाखों नागरिक रोजाना आवागमन करते हैं, उसे शोरूम मालिकों ने अपने व्यावसायिक फायदे के लिए बंधक बना रखा है।
जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों पर बंधी पट्टी
हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से कांदिवली ट्रैफिक विभाग, बीएमसी और मुंबई पुलिस के आला अधिकारी रोजाना गुजरते हैं। बावजूद इसके, किसी को यह अवैध पार्किंग दिखाई नहीं देती। जनता सवाल पूछ रही है कि:
- क्या जिम्मेदार अधिकारियों को यह खुली मनमानी नजर नहीं आती या जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
- क्या आम नागरिकों के लिए बने नियम इन बड़े शोरूम और रेस्टोरेंट मालिकों पर लागू नहीं होते?
दिखावे की कार्रवाई और ‘सेटिंग’ का खेल
अक्सर देखा जाता है कि जब ‘वशिष्ठ वाणी’ जैसी निडर पत्रकारिता द्वारा इन मुद्दों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता है, तो प्रशासन में कुछ समय के लिए दिखावे की हलचल होती है। अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, खानापूर्ति करते हैं और मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। समस्या को जड़ से खत्म करने के बजाय ‘डील’ और ‘सेटिंग’ के दम पर यह अवैध धंधा फिर से शुरू हो जाता है।
‘तुकाराम मुंढे’ जैसी सख्ती की दरकार
कहा जाता है कि अगर व्यवस्था में ईमानदार और सख्त अधिकारी बैठे हों, तो जनता को शिकायत करने की जरूरत ही नहीं पड़ती; अधिकारी खुद संज्ञान लेकर बुलडोजर जैसी कार्रवाई कर देते हैं। लेकिन आज हर कोई ‘तुकाराम मुंढे’ जैसा कर्तव्यनिष्ठ नहीं बन सकता। यही कारण है कि कांदिवली में कार शोरूम और रेस्टोरेंट मालिकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सार्वजनिक सड़कों पर खुलेआम कब्जा जमाए बैठे हैं, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि किस अधिकारी को कैसे ‘मैनेज’ करना है।
जनता की मांग:
क्षेत्रीय नागरिकों और राहगीरों की मांग है कि बीएमसी कमिश्नर और मुंबई पुलिस कमिश्नर इस मामले का तुरंत संज्ञान लें। रेनॉल्ट शोरूम के बाहर सड़क पर हो रहे इस 24 घंटे के अवैध कब्जे को तुरंत खाली कराया जाए और इस लापरवाही में लिप्त लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।












