मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मालवणी गेट नंबर 1 से 8 और म्हाडा परिसर की सड़कों पर बने खतरनाक गड्ढों को लेकर स्थानीय नागरिकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। सड़क की बदहाल स्थिति और गड्ढों की समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए शिव सम्राट फाउंडेशन ने एक अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने मालवणी गेट नंबर 6 पर सड़क के एक बड़े गड्ढे में प्रतीकात्मक रूप से मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू कर मनपा प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन के जरिए प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को यह संदेश देने की कोशिश की कि यदि सड़क के गड्ढों की समय पर मरम्मत नहीं की गई तो बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी जमा होकर सड़क की स्थिति ऐसी हो जाती है कि वहां वाहन चलाना तो दूर, उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे सड़क की जगह तालाब बन गया हो।
14 जुलाई को मनपा अधिकारियों को दी गई थी शिकायत
सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिव सम्राट फाउंडेशन के अध्यक्ष सम्राट बागुल ने बताया कि मालवणी क्षेत्र की सड़कों पर बने खतरनाक गड्ढों को लेकर 14 जुलाई 2026 को मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे, सहायक आयुक्त पी/पश्चिम कुंदन वळवी तथा सहायक अभियंता परिरक्षण विभाग महेश नांदेकर को लिखित शिकायत दी गई थी।
शिकायत में मालवणी गेट नंबर 1 से 8 सहित म्हाडा परिसर की सड़कों पर बने खतरनाक गड्ढों की तत्काल मरम्मत कराने और नागरिकों को सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
दो दिन में ही उखड़ गया डामर, फिर दिखाई दिए गड्ढे
आंदोलनकारियों का आरोप है कि शिकायत के बाद सड़क अभियंता आनंद जाधव की ओर से कुछ स्थानों पर गड्ढों में अस्थायी रूप से डामर डालकर मरम्मत की गई। लेकिन यह मरम्मत ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, मरम्मत किए जाने के महज दो दिन बाद ही सड़क पर दोबारा गड्ढे दिखाई देने लगे। इसके बाद स्थानीय नागरिकों और फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। आंदोलनकारियों ने इस कथित अस्थायी मरम्मत की गुणवत्ता और सड़क अभियंता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।
‘मुंबई गड्ढामुक्त कब होगी?’
शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने और अधिकारियों की कथित लापरवाही के विरोध में शिव सम्राट फाउंडेशन ने गड्ढे में ही प्रतीकात्मक मत्स्य पालन कर प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास किया।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “मुंबई गड्ढामुक्त कब होगी?” और “लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?” जैसे सवाल उठाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि नागरिकों को सुरक्षित सड़क देना मनपा की जिम्मेदारी है और केवल अस्थायी तौर पर गड्ढे भरने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
‘गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं’ — सम्राट बागुल
सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट बागुल ने कहा कि मुंबई की सड़कों पर बने खतरनाक गड्ढे आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि नागरिक नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं, इसके बावजूद उन्हें सुरक्षित और अच्छी सड़कें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
सम्राट बागुल ने सवाल उठाते हुए कहा कि गड्ढों के कारण वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है और सड़क पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने मनपा प्रशासन से यह भी पूछा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी और मुंबई को वास्तव में गड्ढामुक्त कब किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम की गुणवत्ता की निगरानी और जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
स्थायी मरम्मत की मांग
शिव सम्राट फाउंडेशन ने मनपा प्रशासन से मांग की कि मालवणी गेट नंबर 1 से 8 तथा म्हाडा परिसर की सड़कों का निरीक्षण कर सभी खतरनाक गड्ढों को चिन्हित किया जाए और उनकी स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्थान पर मरम्मत के बाद दोबारा गड्ढे बन रहे हैं तो उसकी गुणवत्ता की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वाले नागरिकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने लिया आंदोलन में हिस्सा
इस अनोखे आंदोलन में अंकुश भाटकर, श्रद्धा मुळीक, मीनाली भाटकर, रुपाली सिंह, शकीला सय्यद, लता दीदी, नीलम दीदी और केशव सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने उपस्थित रहकर आंदोलन को सफल बनाया।
गड्ढे में प्रतीकात्मक रूप से मत्स्य पालन कर किया गया यह विरोध प्रदर्शन मालवणी की बदहाल सड़कों को लेकर नागरिकों की नाराजगी का अनोखा तरीका रहा। अब देखना होगा कि इस प्रदर्शन के बाद मनपा प्रशासन मालवणी की सड़कों की स्थिति सुधारने और गड्ढों की स्थायी मरम्मत के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।












