विशेष समाचार रिपोर्ट (मुंबई):
कांदिवली (पश्चिम), थाने के पास स्थित छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर जनसुरक्षा और बारूद के ढेर पर बैठे सैकड़ों परिवारों की जिंदगी से हो रहे खिलवाड़ पर ‘वशिष्ठ वाणी’ ने अंतिम मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय भारत गैस एजेंसी द्वारा सार्वजनिक सड़क, फुटपाथ और मुख्य ट्रैफिक सिग्नल क्षेत्र को अवैध रूप से अपना ‘ओपन एलपीजी गोदाम’ बनाने, 24 घंटे 14 कमर्शियल एलपीजी वाहनों को खड़ा रखने और कांदिवली ट्रैफिक पुलिस व आरटीओ (RTO) की 3 महीनों से जारी संदेहास्पद चुप्पी के खिलाफ समाचार समूह द्वारा सभी शीर्ष प्रशासनिक विभागों को साक्ष्यों सहित आधिकारिक शिकायत ईमेल भेज दिया गया है।
इन 4 प्रमुख विभागों को भेजा गया है शिकायत पत्र:
- संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक), मुंबई: ट्रैफिक सिग्नल और आवासीय परिसर के बाहर सड़क घेरकर खड़े 14 एलपीजी वाहनों पर दैनिक ई-चालान, क्रेन कार्रवाई और सड़क खाली कराने की मांग।
- मुख्य अग्नि शमन अधिकारी (CFO – Mumbai Fire Brigade): घनी आबादी के बीच 14 ज्वलनशील वाहनों के अवैध जमावड़े से बने Explosive Hazard पर तुरंत फायर सेफ्टी इंस्पेक्शन (Site Inspection) और नोटिस जारी करने की मांग।
- परिवहन आयुक्त (महाराष्ट्र) एवं RTO: व्यावसायिक वाहनों द्वारा परमिट नियमों के उल्लंघन और सार्वजनिक सड़क को बस/ट्रक डिपो बनाने पर वाहनों को ज़ब्त (Seize) करने की मांग।
- विजिलेंस हेड व चेयरमैन (BPCL – भारत पेट्रोलियम): डीलर द्वारा Marketing Discipline Guidelines (MDG) और PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation) नियमों की धज्जियां उड़ाने पर डीलरशिप के खिलाफ कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने की चेतावनी।
“20 साल से कर रहे हैं, अब क्या दिक्कत है?” – बेखौफ रवैये पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, जब वशिष्ठ वाणी की टीम ने इस अवैध भंडारण पर सवाल उठाया, तो एजेंसी प्रबंधन का अड़ियल जवाब था कि “हम 20 साल से यहाँ गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं, किसी को दिक्कत नहीं हुई।”
यह बयान यह साबित करने के लिए काफी है कि 20 सालों से प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत या आंखें मूंदने की वजह से यह अवैध खेल चल रहा है। एलपीजी एक अति-संवेदनशील और विस्फोटक गैस है। यदि किसी लापरवाही, शॉर्ट-सर्किट या बीड़ी/सिगरेट की चिंगारी से एक भी गाड़ी में विस्फोट होता है, तो पूरा छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स मिनटों में राख के ढेर में तब्दील हो जाएगा।
आरटीआई पर चुप्पी और अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही
‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा दाखिल RTI (सूचना का अधिकार) का जवाब न देना यह दर्शाता है कि स्थानीय कांदिवली ट्रैफिक अधिकारियों के पास इस अनधिकृत पार्किंग को सही ठहराने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
ईमेल में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि भविष्य में कोई दुर्भाग्यपूर्ण अग्निकांड या बड़ी दुर्घटना घटती है, तो इसकी आपराधिक जिम्मेदारी (Criminal Negligence) केवल भारत गैस एजेंसी मालिक की ही नहीं, बल्कि शिकायत मिलने के बावजूद मूकदर्शक बने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अधिकारियों की भी तय की जाएगी।
‘वशिष्ठ वाणी’ की इस सख्त मुहिम के बाद अब गेंद पूरी तरह से प्रशासन के पाले में है। देखना यह होगा कि वरिष्ठ पुलिस आयुक्त, फायर ब्रिगेड और BPCL विजिलेंस इस ‘टाइम बम’ को हटाते हैं या किसी बड़े हादसे का इंतजार करते हैं!










