मुंबई: मालवणी गेट नं. 8, सामना नगर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने दोहरे चरित्र और चतुराई से नियम-कानून को ठेंगा दिखाने की कोशिश कर रहा है। यह विषय है मालवणी स्वप्नपूर्ति सोसाइटी और फेडरेशन के अध्यक्ष बालासाहेब भगत की, जिन्हें स्थानीय लोग अब “मास्टरमाइंड” कहने लगे हैं।
अवैध पार्किंग का धंधा: मालवणी गेट नं. 8 में म्हाडा की खुली जगह पर बालासाहेब भगत ने फेडरेशन बनाकर कई वर्षों तक अवैध पार्किंग का धंधा चलाया। वाहन मालिकों से पार्किंग के नाम पर मोटी रकम वसूली गई, और यह गैरकानूनी गतिविधि चुपके-चुपके चलती रही। लेकिन जब इसकी भनक म्हाडा अधिकारियों को लगी, तो उन्होंने तुरंत फेडरेशन को नोटिस जारी कर अवैध पार्किंग बंद करने का आदेश दिया।
नो पार्किंग बोर्ड का दिखावा: म्हाडा के नोटिस के बाद बालासाहेब भगत ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए एक चाल चली। उन्होंने म्हाडा के खुली जगह के पूरे क्षेत्र में “नो पार्किंग” के बोर्ड लगा दिए और म्हाडा अधिकारियों को सूचित किया कि बोर्ड लगाने के बावजूद लोग नियम तोड़कर वाहन खड़े कर रहे हैं। सवाल उठता है कि अगर भगत नियमों का पालन करवाना चाहते थे, तो नो पार्किंग का बोर्ड क्यों लगाया, क्या यह सब म्हाडा के अधिकारियों को दिखाने के लिए किया? और अब नो पार्किंग बोर्ड लगाकर वे कांदिवली ट्रैफिक पुलिस को कार्य से कैसे रोक सकते हैं, अगर यही सब करना है तो फिर नो पार्किंग का बोर्ड वहां से हटा देना चाहिए, पर ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि उनका यह दोहरा चरित्र है।

ट्रैफिक पुलिस के काम में बाधा: म्हाडा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज की। जब ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी अवैध पार्किंग के खिलाफ चालान काटने पहुंचे, तो बालासाहेब भगत ने एक नया हथकंडा अपनाया। उन्होंने स्वप्नपूर्ति सोसाइटी की औरतों को आगे करके पुलिस के काम में बाधा डालना शुरू कर दिया। यह एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि पुलिस पर दबाव बनाया जा सके और चालान की कार्रवाई रुक जाए।
दोहरा चरित्र और मीडिया को बदनाम करने की कोशिश: बालासाहेब भगत बार-बार दावा करते हैं कि आरटीओ को मीडिया द्वारा बुलाया जाता है, लेकिन वे यह कभी नहीं बताते कि नो पार्किंग बोर्ड उन्होंने स्वयं लगवाए और म्हाडा ने ट्रैफिक पुलिस को शिकायत की थी। जब मीडिया ने उनके अवैध पार्किंग के धंधे और अवैध निर्माण को उजागर किया, जिसके बाद इनका खात्मा हुआ, तो भगत ने मीडिया को बदनाम करने की कोशिश की। हालांकि, उनकी यह कोशिश कई बार नाकाम रही है।
सवाल जो बाकी हैं…
- एक तरफ नो पार्किंग बोर्ड लगवाना और दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस को चालान काटने से रोकना—यह दोहरा मापदंड क्यों?
- क्या बालासाहेब भगत का मकसद केवल अपनी गलतियों को छिपाना और स्थानीय लोगों को गुमराह करना है?
- क्या म्हाडा और ट्रैफिक पुलिस इस मामले में कठोर कार्रवाई करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियां रोकी जा सकें?
निष्कर्ष: मालवणी गेट नं. 8 का यह मामला न केवल अवैध पार्किंग की समस्या को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी चतुराई से नियम-कानून को तोड़ने की कोशिश करता है। अब समय है कि स्थानीय प्रशासन और नागरिक इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ एकजुट हों और सच्चाई को सामने लाएं।
मालवणी की जनता से अपील: मालवणी गेट नं. 8 के निवासियों, यह समय है जागने का। आपके इलाके में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और इसका ज़िम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि वे हैं जो खुद को आपका हितैषी बताते हैं। हमारी अपील है कि आप इस साजिश के खिलाफ आवाज़ उठाएं। म्हाडा और कांदिवली ट्रैफिक डिवीजन से हम मांग करते हैं कि इस मामले की गहन जांच हो और दोषियों को सजा मिले।

