मुंबई, मलाड: मुंबई की सड़कों पर आम जनता के लिए चलना दूभर होता जा रहा है, और इसका ताजा उदाहरण मलाड वेस्ट स्थित मोदी हुंडई (Modi Hyundai) शोरूम के बाहर देखने को मिल रहा है। वशिष्ठ वाणी (Vashishtha Vani) की हालिया ग्राउंड रिपोर्टिंग में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शोरूम ने न्यू लिंक रोड और सार्वजनिक फुटपाथ को अपनी निजी पार्किंग में तब्दील कर दिया है।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
रिपोर्ट में दिखाए गए आज के दृश्यों ने मुंबई आरटीओ (RTO) और स्थानीय प्रशासन के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीओ का कहना है कि उनके द्वारा इस शोरूम के खिलाफ कार्रवाई की गई है, लेकिन सड़क पर कतार से खड़ी नई और पुरानी गाड़ियों की भीड़ कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जनता का सवाल: अगर आरटीओ ने वास्तव में कड़ी कार्रवाई की है, तो फिर ये गाड़ियां आज भी सड़क पर सीना ताने क्यों खड़ी हैं? क्या आरटीओ केवल छोटे वाहनों या आम आदमी पर कार्रवाई करके अपना कोटा पूरा कर रहा है, जबकि बड़े शोरूम मालिकों को खुली छूट दी गई है?
BMC की चुप्पी पर संदेह
सवाल केवल आरटीओ से ही नहीं, बल्कि बीएमसी (BMC P-North Ward) से भी है। स्थानीय नागरिकों का पूछना है कि:
- क्या बीएमसी ने मोदी हुंडई को सड़क पर पार्किंग की लिखित अनुमति दी है?
- यदि नहीं, तो अब तक शोरूम को कारण बताओ नोटिस जारी कर फुटपाथ खाली क्यों नहीं कराया गया?
- क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, क्योंकि पैदल चलने वालों को इन गाड़ियों की वजह से बीच सड़क पर जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है?
नियम सिर्फ आम आदमी के लिए?
वशिष्ठ वाणी पर वायरल हो रही इन तस्वीरों ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और शोरूम के बीच कोई ‘सांठ-गांठ’ है, जिसके कारण कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है। चिंचोली बंदर फायर ब्रिगेड के पास स्थित यह क्षेत्र ट्रैफिक के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, और ऐसी अवैध पार्किंग आपातकालीन सेवाओं के लिए भी खतरा बन सकती है।
निष्कर्ष:
अब देखना यह होगा कि वशिष्ठ वाणी की इस रिपोर्ट के बाद मुंबई आरटीओ और बीएमसी अपनी नींद से जागते हैं या फिर मोदी हुंडई का यह अवैध कब्जा इसी तरह जारी रहेगा।











