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कांदिवली में ‘नियमों’ का जनाजा: सतीश राउत की नाकामी और ‘मलाई’ का खेल

कांदिवली: क्या कांदिवली RTO में सब कुछ ‘मैनेज’ है? क्या यहाँ कानून के हाथ सिर्फ आम जनता को तंग करने के लिए हैं, और रसूखदार अतिक्रमणकारियों के सामने नतमस्तक? एकता नगर रोड की बदहाली और वहां मौजूद सुरक्षा खतरों को लेकर उठ रहे सवालों पर कांदिवली RTO के अधिकारी सतीश राउत की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


मौत को दावत देता एकता नगर रोड

एकता नगर रोड पर भारत गैस से भरे सिलेंडरों का खुलेआम जमावड़ा किसी ‘चलते-फिरते बम’ से कम नहीं है। महीनों से चल रही इस अवैध पार्किंग और लोडिंग-अनलोडिंग के कारण स्थानीय निवासियों की जान जोखिम में है। ‘वशिष्ठ वाणी’ ने कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन सतीश राउत के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।


‘न शर्म है, न कार्रवाई का इरादा’

हैरानी की बात यह है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी एक भी वाहन वहां से नहीं हटा। न तो गैस सिलेंडरों की अवैध आवाजाही रुकी और न ही सड़क पर कब्जा खाली हुआ। इतने सबूतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद, सतीश राउत का न हिलना यह साबित करता है कि या तो वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह ‘बेकार’ हैं या फिर उन्हें जनता की जान की कोई परवाह नहीं है।


वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी—क्या ‘मलाई’ का हिस्सा हैं?

सवाल सिर्फ सतीश राउत तक सीमित नहीं है। उनके वरिष्ठ अधिकारी इस लापरवाही पर क्यों मौन हैं? स्थानीय जनता में अब यह चर्चा आम है कि सतीश राउत को कांदिवली का ‘अघोषित मालिक’ बना दिया गया है, जो ‘मलाई’ के चक्कर में नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। क्या वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण ही उन्हें इतनी हिम्मत दे रहा है?

जनता का साफ संदेश: ‘राउत हटाओ, तभी सुधरेगा कांदिवली’

कांदिवली की जनता अब आश्वासन से थक चुकी है। यह साफ है कि जब तक सतीश राउत को उनके पद से नहीं हटाया जाता, कांदिवली की यातायात और सुरक्षा व्यवस्था सुधरने वाली नहीं है।

वशिष्ठ वाणी का सीधा सवाल: * सतीश राउत, आपको कब शर्म आएगी?

  • क्या आप किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?
  • वरिष्ठ अधिकारी जवाब दें—क्या आप इस भ्रष्टाचार और लापरवाही के हिस्सेदार हैं?

जनता अब सड़कों पर उतरने और प्रशासन को सीधे जवाब देने के लिए तैयार है। समय आ गया है कि इस ढुलमुल रवैये के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाए।

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