मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई में प्रशासन का इक़बाल खत्म हो चुका है या फिर अधिकारियों ने अवैध कब्जाधारियों से ‘सेटिंग’ कर ली है? मलाड वेस्ट के चारकोप सिग्नल पर BMC की तथाकथित ‘महा-कार्रवाई’ की जो हवा निकली है, वह शर्मनाक है। वशिष्ठ वाणी के पास मौजूद तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे अधिकारियों की टीम के जाते ही फुटपाथ पर फिर से पौधों, हेलमेट और खिलौनों का अवैध साम्राज्य सज गया।
तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं (सबूत के साथ)
खबर में लगी तस्वीरें साफ दिखा रही हैं कि BMC की कार्रवाई केवल कैमरों के लिए थी।
- सुबह की कार्रवाई: अधिकारियों ने कुछ बैनर फाड़े और डंडे पटके।
- शाम का मंजर: उसी जगह पर कब्जाधारी और भी ज्यादा ठसक के साथ अपनी दुकानें जमाए बैठे हैं।
यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या BMC के दस्ते को यह अतिक्रमण दिखाई नहीं दिया, या फिर अधिकारियों ने ‘आंखें मूंदने’ की कीमत वसूल ली है?
फुटपाथ नहीं, यह भ्रष्टाचार का ‘हाइवे’ है!
राहगीर सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं, लेकिन P-North वार्ड के अधिकारियों को इसकी कोई फिक्र नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खेल बिना किसी ‘बड़े वरदहस्त’ के संभव नहीं है। क्या हफ्ता वसूली का हिस्सा ऊपर तक जाता है, इसलिए कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है?
वशिष्ठ वाणी की खुली चेतावनी:
प्रशासन यह न समझे कि फाइलों में ‘कार्रवाई पूरी हुई’ लिखकर मामला रफा-दफा हो जाएगा। वशिष्ठ वाणी सबूतों के साथ इस मुद्दे को तब तक उठाएगा जब तक चारकोप का फुटपाथ आम जनता के लिए पूरी तरह आजाद नहीं हो जाता। अगर अगले 24 घंटों में ठोस एक्शन नहीं हुआ, तो यह प्रशासन की ‘सीधी मिलीभगत’ मानी जाएगी।












