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BMC की चुप्पी या ‘धर्म’ का कवच? फुटपाथ से लेकर सड़क तक अतिक्रमण, वशिष्ठ वाणी ने BMC को भेजा कानूनी नोटिस!

मुंबई: शहर में अब फुटपाथ पर चलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। सड़कों पर पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथों पर ‘धर्म के व्यापारियों’ ने अवैध कब्जा जमा लिया है। यह अतिक्रमण अब इतना बढ़ गया है कि फुटपाथ कम पड़ने पर सड़क के मुख्य हिस्से को भी कवर कर लिया गया है, जिससे राहगीरों की सुरक्षा दांव पर लग गई है।

वशिष्ठ वाणी ने प्रशासन को भेजा कानूनी नोटिस

इस गंभीर मामले में ‘वशिष्ठ वाणी’ ने सख्त कदम उठाते हुए BMC कमिश्नर (MCGM हेडक्वार्टर), साथ ही P/नॉर्थ (मालाड), P/साउथ (गोरेगांव) और R/साउथ (कांदिवली) के सहायक आयुक्तों को आधिकारिक तौर पर कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेज दिया है। यह नोटिस प्रशासन की लापरवाही और अवैध कब्जों के प्रति उनकी चुप्पी को चुनौती देता है।

‘वशिष्ठ वाणी’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग में मुंबई के तीन प्रमुख इलाकों में प्रशासनिक विफलता की पोल खुल गई है:

  • एकता नगर, कांदिवली (पश्चिम): यहाँ न केवल फुटपाथ पर पूर्ण कब्जा है, बल्कि सड़क के हिस्से पर भी अवैध निर्माण कर लिया गया है।

न्यू लिंक रोड, बांगुर नगर सिग्नल: यहाँ की स्थिति और भी भयावह है। फुटपाथ को पूरी तरह घेरकर ‘लाइन से दो मंडप’ बना दिए गए हैं, जिससे यातायात और पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बची है।


  • मार्वे रोड, अस्मिता ज्योति बिल्डिंग के बाहर: यहाँ तो अतिक्रमण की हद हो गई है। फुटपाथ के साथ-साथ सड़क पर भी कब्जा जारी है, जिससे आम जनता का चलना दूभर हो गया है।

प्रशासन को ‘वशिष्ठ वाणी’ की दो टूक

हमारा प्रशासन से सीधा सवाल है:

  • क्या फुटपाथ और सड़क पर अतिक्रमण करने की कोई आधिकारिक अनुमति दी गई है?
  • क्यों प्रशासन इन कब्जों पर आँख मूंदकर बैठा है? क्या ‘धर्म’ के नाम पर जनता की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी का संरक्षण प्राप्त है?

न्याय की राह पर ‘वशिष्ठ वाणी’:

हम केवल खबरें प्रकाशित नहीं करते, हम समाधान के लिए लड़ते हैं। कानूनी नोटिस भेजना हमारी पहली कड़ी है। यदि इन अतिक्रमणों को अविलंब नहीं हटाया गया और प्रशासन ने इस पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो ‘वशिष्ठ वाणी’ अब चुप नहीं बैठेगी। हम जनहित में न्याय के लिए सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा—क्या ये फुटपाथ जनता के सुरक्षित चलने के लिए हैं, या अतिक्रमणकारियों की निजी संपत्ति?

जनता जवाब चाहती है और ‘वशिष्ठ वाणी’ उस जवाब को लेकर रहेगी!

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