मुंबई (मालाड): क्या मुंबई नगर निगम (BMC) के कुछ अधिकारी खुद को देश के कानून और संविधान से ऊपर समझने लगे हैं? मालाड के वार्ड 35 से आ रही खबरें तो इसी ओर इशारा कर रही हैं। यहाँ भदरण नगर में रेलवे ट्रैक के पास हो रहे अवैध निर्माण ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाला है, बल्कि बीएमसी की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
🔍 कुंदन वाल्वी: अधिकारी या अवैध निर्माण के मसीहा?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ता जिग्नेश परमार का सीधा आरोप है कि बीएमसी अधिकारी कुंदन वाल्वी इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड हैं।

- सवाल 1: जब अवैध निर्माण के खिलाफ बीएमसी ने एक साल पहले लेटर जारी किया था, तो आज तक उस पर हथौड़ा क्यों नहीं चला?
- सवाल 2: क्या कुंदन वाल्वी ने कानून को मजाक बना दिया है कि नोटिस देने के बाद माफिया को निर्माण पूरा करने का समय दिया जा रहा है?
⚠️ संवेदनशील इलाके में बड़ा खतरा
यह अवैध निर्माण रेलवे ट्रैक के पास (कोयला वाला गली) हो रहा है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह अनदेखी किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है। लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि “जो लोग कहते हैं बीएमसी भ्रष्ट है, कुंदन वाल्वी जैसे अधिकारी आज उसे सच साबित करने में लगे हैं।”
🛡️ भ्रष्टाचार का ‘खुला खेल’
एक साल तक कार्रवाई न करना स्पष्ट संकेत देता है कि कागजों पर नोटिस सिर्फ दिखावे के लिए जारी किए जाते हैं, ताकि ऊपरी तौर पर रिकॉर्ड साफ रहे, जबकि जमीन पर माफिया के साथ ‘सेटिंग’ का खेल चलता रहे। जिग्नेश परमार पर हुआ हमला यह साबित करता है कि माफिया को प्रशासन का मौन संरक्षण प्राप्त है।
🟥 वशिष्ठ वाणी के ‘चुभते’ सवाल (BMC आलाकमान से):
- कमिश्नर साहब ध्यान दें: क्या बीएमसी के आला अधिकारी कुंदन वाल्वी की संपत्तियों और उनके कार्यकाल के दौरान जारी किए गए ‘पेंडिंग’ नोटिसों की जांच कराएंगे?
- कानून का डर खत्म? क्या कुंदन वाल्वी के लिए बीएमसी की नियमावली कोई मायने नहीं रखती?
- जांच कब? क्या इस अवैध निर्माण के खेल और भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोई उच्च स्तरीय कमेटी बैठाई जाएगी या फाइलें इसी तरह धूल फांकती रहेंगी?
निष्कर्ष:
यह केवल एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो जनता अपने प्रशासन पर करती है। अगर बीएमसी आलाकमान ने तुरंत कुंदन वाल्वी पर कार्रवाई नहीं की और उस अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया, तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार की जड़ें मंत्रालय तक फैली हुई हैं।












