बीएमसी अधिकारियों पर मिलीभगत के सवाल

मुंबई/वशिष्ठ वाणी: मलाड के सामना नगर, मालवानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य किए जाने का मामला सामने आया है। मंगलवार को एक स्थानीय निवासी ने हमारी टीम को जानकारी देकर बताया कि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में हरे-भरे जंगलों व खुले स्थानों में अचानक भारी निर्माण गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं। सूत्रों द्वारा उपलब्ध कराए गए मैप और सैटेलाइट तस्वीरों में पहले जहां हरा क्षेत्र दिखाई दे रहा था, वही स्थान अब एक बड़े रियल्टी प्रोजेक्ट में बदलता दिखाई दे रहा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह निर्माण कार्य बीएमसी अधिकारियों की अनदेखी या कथित मिलीभगत के बिना संभव नहीं हो सकता। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि इन निर्माणों को कोई अनुमति नहीं मिली है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर मशीनरी, निर्माण सामग्री और लेबर कैसे पहुँच रही है और किसके आदेश या संरक्षण में यह कार्य जारी है?

सूत्रों से यह भी जानकारी मिली कि निर्माण से पहले कई पुराने पेड़ों को कथित रूप से काटा गया और क्षेत्र की प्राकृतिक बनावट को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि पेड़ों की कटाई पर पर्यावरण विभाग और बीएमसी दोनों के कड़े नियम लागू हैं, लेकिन अब तक न तो कोई निगरानी दिखाई दी और न ही कोई कार्रवाई।

स्थानीय निवासी यह भी पूछ रहे हैं कि यदि यह प्रोजेक्ट वैध है, तो इसकी अनुमति, एनओसी, पर्यावरण क्लीयरेंस और CRZ/NDZ संबंधित दस्तावेज़ सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए? वहीं अगर यह प्रोजेक्ट अवैध है, तो फिर बीएमसी और संबंधित विभागों ने इसे रोकने के लिए अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया?

गौरतलब है कि हाल ही में मुंबई में अवैध निर्माण रैकेट और जमीन माफिया पर कई गंभीर खुलासे हुए हैं, जिनमें SIT रिपोर्ट में बीएमसी के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई में ढील, दस्तावेजों में हेरफेर, और नक्शों की फर्जी मंजूरियों जैसे आरोप शामिल रहे हैं।

मलाड-मालवणी क्षेत्र पहले भी पर्यावरणीय और भू-उपयोग विवादों में चर्चा में रहा है, और अब नए खुलासे ने एक बार फिर इस मुद्दे को गर्मा दिया है। फिलहाल स्थानीय लोग बीएमसी, पर्यावरण विभाग और पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

हमारी टीम ने इस मामले में बीएमसी से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया है। जवाब मिलते ही इसे अपडेट किया जाएगा।