- ₹35,000 नकद लेने के बाद भी पप्पी के दस्तावेज न देने का आरोप; लीगल नोटिस लेने से इंकार के बाद मामला उपभोक्ता अदालत पहुंचा।
मुंबई: राजधानी मुंबई के अंधेरी वेस्ट (शास्त्री नगर) स्थित ‘Ohh My Dog’ पेट शॉप एक गंभीर व्यावसायिक विवाद और कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ गया है। संस्थान द्वारा ग्राहक से हजारों रुपये नकद वसूलने के बावजूद पप्पी के अनिवार्य दस्तावेज न देने, लीगल नोटिस लेने से इंकार करने और बिक्री के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में अब उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) का रुख किया गया है।
डिजिटल पेमेंट से इंकार, नकद लेने के बाद भी नहीं दिया बिल
प्राप्त विवरण के अनुसार, वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन श्री अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने बीते 21 जून को ‘Ohh My Dog’ पेट शॉप से ₹35,000 का नकद भुगतान कर एक Shih Tzu नस्ल का पप्पी खरीदा था।
आरोप है कि पेट शॉप प्रबंधन द्वारा ऑनलाइन पेमेंट लेने से इंकार किया गया और ग्राहक से एटीएम से कैश निकलवा कर भुगतान लिया गया। इसके बावजूद न तो खरीद का कोई पक्का बिल दिया गया और न ही पप्पी का हेल्थ या ब्रीडिंग सर्टिफिकेट। दस्तावेज मांगने पर “एक सप्ताह बाद देने” का आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया।
लीगल नोटिस लेने से इंकार, डाकिए को लौटाया
जब बार-बार मांगने पर भी पप्पी के कागजात नहीं मिले, तो ग्राहक की लीगल टीम द्वारा 29 जून को पंजीकृत डाक के माध्यम से पेट शॉप को लीगल नोटिस भेजा गया।
आश्चर्यजनक रूप से, दुकान पर पर्याप्त स्टाफ और पेट कैफे का संचालन होने के बावजूद लिफाफे को लेने से मना कर दिया गया। नतीजतन, डाक विभाग ने लिफाफे पर ‘Unclaimed’ (दावा न किया गया) अंकित कर उसे वापस लौटा दिया। कानून के जानकारों के अनुसार, इस तरह जानबूझकर नोटिस न लेना अदालत के समक्ष ‘Deemed Service’ (तामील माना जाना) की श्रेणी में आता है, जिससे व्यवसायी की मंशा पर गंभीर सवाल उठते हैं।
कानून और नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल
पशु कल्याण नियमों (Prevention of Cruelty to Animals Rules, 2017) के तहत किसी भी ब्रीडर या पेट शॉप के लिए बेचे जाने वाले जानवर के स्वास्थ्य, टीकाकरण और उत्पत्ति से संबंधित सभी दस्तावेज ग्राहक को देना अनिवार्य है। इसके अलावा, बिना बिल के नकद लेनदेन करना Consumer Protection Act, 2019 के अंतर्गत Unfair Trade Practice (अनुचित व्यापार व्यवहार) की श्रेणी में आता है।
जब ग्राहक ने पारिवारिक कारणों से पप्पी वापस करने या नियमानुसार समाधान की बात की, तो प्रबंधन द्वारा ‘नो-रिटर्न व नो-सेल’ पॉलिसी का हवाला दिया गया। ग्राहक का आरोप है कि खरीदारी के समय ऐसी किसी नीति की जानकारी नहीं दी गई थी।
कंज्यूमर कोर्ट में याचिका दाखिल, मीडिया हाउस ने मांगा जवाब
दुकानदार के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने उपभोक्ता अदालत में औपचारिक शिकायत दाखिल कर दी है।
पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के तहत वशिष्ठ मीडिया हाउस द्वारा पेट शॉप प्रबंधन को व्हाट्सएप एवं आधिकारिक माध्यमों से संपर्क कर उनका पक्ष रखने का अवसर दिया गया। परंतु निर्धारित समय तक उनकी ओर से कोई लिखित जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
कोई भी व्यवसायी या संस्था कानून से ऊपर नहीं हो सकती। बेजुबान जानवरों के व्यापार में पारदर्शिता, सरकारी नियमों का पालन और ग्राहकों को पक्का बिल देना कानूनी बाध्यता है। प्रशासन और पशु कल्याण बोर्ड (State Animal Welfare Board) को ऐसे मामलों का संज्ञान लेकर संबंधित पेट शॉप्स के लाइसेंस और उनकी कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।













