विशेष समाचार रिपोर्ट (मुंबई):
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के पश्चिमी उपनगर—विशेषकर मलाड (पश्चिम), गोरेगांव (पश्चिम) और अंधेरी (पश्चिम) के न्यू लिंक रोड पर अवैध पार्किंग और फुटपाथ अतिक्रमण का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय नागरिकों और मीडिया द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, गोरेगांव ट्रैफिक विभाग और आरटीओ (RTO) अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल हफ्ते में एक बार खानापूर्ति कर मामला रफा-दफा कर देते हैं।
सबसे चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा यह हुआ है कि जब भी कोई नागरिक या मीडिया प्रतिनिधि अवैध पार्किंग की शिकायत गोरेगांव ट्रैफिक पुलिस को भेजता है, तो विभाग के अधिकारी उस शिकायत की जानकारी और मैसेज संबंधित होटल, शो-रूम और रेस्टोरेंट मालिकों को फॉरवर्ड कर देते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान उजागर करने और नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों को संरक्षण देने का यह खेल प्रशासनिक सांठगांठ की पोल खोल रहा है।
इन 21 प्रमुख ठिकानों पर कब्जा, प्रशासन पसार रहा हाथ:
- धीरज सागर बिल्डिंग (ThinKarz, मलाड वेस्ट): सड़क पर लगातार खड़ी गाड़ियां।
- इनफिनिटी मॉल और डी-मार्ट के बाहर (न्यू लिंक रोड): ऑटो-रिक्शा चालकों ने मुख्य सड़क को ही अपना निजी पार्किंग स्टैंड बना लिया है।
- फ्लैग्स II वेज वर्ल्ड रेस्तरां (चिंचोली बंदर रोड): ग्राहकों और वैनिट पार्किंग के नाम पर सड़क जाम।
- प्राइड रेस्तरां (न्यू लिंक रोड, माइंडस्पेस): अवैध वाहनों का जमावड़ा।
- टीवीएस बाइक शो-रूम (पनाश हाउस, लिंक रोड): शो-रूम के बाहर सड़क पर खड़ी नई और सर्विसिंग वाली गाड़ियां।
- मारुति सुजुकी एरिना शो-रूम (सिद्धांचल आर्केड): मुख्य मार्ग पर अवैध पार्किंग।
- एमजी मोटर कृशिव ऑटो शो-रूम (न्यू लिंक रोड): सार्वजनिक मार्ग का व्यावसायिक इस्तेमाल।
- ग्रीन्स रेस्तरां (लिंकवे एस्टेट, माइंडस्पेस): दिन-रात अवैध लाइन पार्किंग।
- टाटा मोटर्स कार्स शो-रूम (चारमूर्ति कंपाउंड, एवराशाइन मॉल के पास): गाड़ियां सड़क पर खड़ी कर ट्रैफिक बाधित।
- कार्टर्स ब्लू (समृद्धि बिजनेस पार्क): सड़क किनारे गाड़ियों की कतारें।
- क्वाइसेंट हाइट्स (चिंचोली बंदर रोड): पूरी सड़क पर पार्किंग का कब्जा।
- उमंग टावर (माइंडस्पेस, इनऑर्बिट मॉल के पीछे): सार्वजनिक सड़क को अवैध ‘प्राइवेट बस डिपो’ में बदल दिया गया है, जहाँ दर्जनों बसें खड़ी रहती हैं।
- विबग्योर राइज सीबीएसई स्कूल (चिंचोली बंदर): स्कूल के पास अपनी पार्किंग न होने के कारण पूरी सार्वजनिक सड़क पर ही स्कूल बसें पार्क कर दी जाती हैं।
- जोईस पिज्जा (चिंचोली बंदर रोड): डिलीवरी बॉयज़ और ग्राहकों के वाहनों से सड़क जाम।
- गोरेगांव वेस्ट मेट्रो स्टेशन: मेट्रो स्टेशन के नीचे पूरे फुटपाथ को ही पार्किंग बना दिया गया है, जिससे पैदल चलने वालों के लिए कोई जगह नहीं बची।
- मीरा टावर्स (म्हाडा कॉलोनी, अंधेरी वेस्ट): सड़क पर अवैध लाइन पार्किंग।
- श्रीजी / लिंक प्लाजा (ओशिवारा, अंधेरी वेस्ट): ऑफ-रिकॉर्ड बयानों में आरटीओ की लापरवाही साफ उजागर होती है।
- ओशिवारा (मैरीगोल्ड बिल्डिंग के पास): पूरी सड़क को अवैध पार्किंग ज़ोन बना दिया गया है।
- शिवास सैलून (मिलत नगर सर्कल, लोखंडवाला): बेधड़क नो-पार्किंग में खड़ी गाड़ियां।
- वुड रोज अपार्टमेंट (स्वामी समर्थ नगर, लोखंडवाला): आवासीय मार्ग पर अवैध अतिक्रमण।
- लेमन ट्री प्रीमियर होटल (चिंचोली बंदर रोड एक्सटेंशन): होटल के बाहर सड़क पर गाड़ियों का तांता।
कानून और संविधान क्या कहता है?
- मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 122/127: किसी भी सार्वजनिक सड़क पर यातायात बाधित करने वाले वाहन को पुलिस को तुरंत हटाने और चालान काटने का अधिकार और कर्तव्य है। कानून में हफ्ते में एक बार ही कार्रवाई करने का कोई प्रावधान नहीं है; उल्लंघन रहने तक रोजाना कार्रवाई अनिवार्य है।
- शिकायत लीक करना गंभीर अपराध: शिकायतकर्ता की जानकारी उल्लंघनकर्ताओं को देना ‘ड्यूटी में गंभीर लापरवाही’ (Dereliction of Duty) और निजता के अधिकार का हनन है, जिसके खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विभागीय जांच (Departmental Inquiry) की जानी चाहिए।
वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचा मामला
इस पूरे संगठित नेटवर्क और गोरेगांव ट्रैफिक विभाग की ढिलाई के खिलाफ अब संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) मुंबई, डीसीपी ट्रैफिक (वेस्टर्न सबर्ब्स) और परिवहन आयुक्त (महाराष्ट्र) को सबूतों के साथ औपचारिक शिकायत पत्र भेजा गया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इन 21 ठिकानों से अवैध कब्जा हटाकर सख्त कार्रवाई करता है या व्यवस्था पहले की तरह ही चलती रहेगी।














