विशेष संवाददाता,
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के दावों और उसकी जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर है, इसका जीता-जागता उदाहरण मालाड (पश्चिम) के मालवणी इलाके में देखने को मिल रहा है। आधिकारिक शुल्क जमा किए जाने के बावजूद बीएमसी की हीलाहवाली के कारण एक परिवार को अपने ही घर में दुर्गंध और बीमारियों के साए में दिन काटने पड़ रहे हैं।
मामला मालवणी स्थित आजमी नगर, गौसिया मस्जिद के पास का है, जहाँ रहने वाली श्रीमती संगीता सिंह के घर का सेप्टिक टैंक पूरी तरह भर चुका है। टैंक ओवरफ्लो होने से पूरे घर और आसपास के परिसर में भयानक बदबू फैल गई है, जिससे छोटे बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
₹2,900 की रसीद कटी, लेकिन नहीं पहुँचा बीएमसी का वाहन
पीड़ित संगीता सिंह के अनुसार, उन्होंने बीएमसी के नियमों के तहत सेप्टिक टैंक की सफाई (मल-निकासी) के लिए ₹2,900 का निर्धारित शुल्क काफी समय पहले जमा करा दिया था। रसीद कटने के बाद उम्मीद थी कि बीएमसी का सीवर सफाई वाहन (Suction Tanker) तुरंत पहुंचेगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।
कर्मचारी का ‘आज-कल’ वाला रवैया:
संगीता सिंह का आरोप है कि बीएमसी के संबंधित कर्मचारी सचिन चौधरी से जब भी संपर्क किया जाता है, तो वे हर बार “आज आएगा, कल आएगा” कहकर टालमटोल कर देते हैं। पैसे जमा होने के बावजूद बीएमसी कर्मचारी की यह लापरवाही अब परिवार के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है।
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़: नागरिकों में भारी आक्रोश
घर के अंदर फैली दुर्गंध के कारण परिवार का सांस लेना भी दूभर हो चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब आम नागरिक बीएमसी का पूरा शुल्क एडवांस में जमा कर रहा है, तो फिर सेवाओं के लिए उन्हें इस तरह बीएमसी दफ्तरों और कर्मचारियों के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं?
स्थानीय नागरिकों की मुख्य मांगें:
- तत्काल सफाई: आजमी नगर स्थित संगीता सिंह के घर तुरंत मल-निकासी वाहन भेजकर सेप्टिक टैंक की सफाई कराई जाए।
- लापरवाह कर्मचारी पर कार्रवाई: काम टालने वाले बीएमसी कर्मचारी सचिन चौधरी और संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल: टैक्स और फीस देने के बाद भी कब मिलेगी राहत?
बीएमसी की इस ढुलमुल कार्यशैली से मालवणी के नागरिकों में गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का सीधा सवाल है कि जब नागरिक समय पर फीस भर रहे हैं, तो उन्हें त्वरित सुविधा देने के बजाय बीएमसी प्रशासन गहरी नींद में क्यों सोया हुआ है? क्या किसी मासूम बच्चे के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद ही बीएमसी के जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे?










