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मालाड का ‘मायावी’ नगरसेवक: जनता के मुद्दों पर ‘गायब’, पीयूष गोयल के जन्मदिन पर ‘लापता’ से ‘प्रकट’!

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): राजनीति में कुछ लोग ‘भजन’ करने के लिए आते हैं, तो कुछ ‘भजन-मंडली’ में शामिल होकर आलाकमान को खुश करने के लिए! मालाड वेस्ट (वार्ड 35) के नगरसेवक योगेश वर्मा की कार्यशैली को देखकर तो यही लगता है कि इन्होंने ‘गायब होने’ और ‘अचानक प्रकट होने’ का कोई प्रोफेशनल कोर्स कर रखा है।

योगेश वर्मा का ‘मायावी अवतार’

पिछले कई महीनों से ‘वशिष्ठ वाणी’ मालाड वेस्ट के भद्रन नगर (कोयला वाला गली) में भू-माफिया द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण का मुद्दा उठा रही है। लेकिन इस दौरान हमारे नगरसेवक महोदय की आंखों पर ऐसी ‘पट्टी’ बंधी थी कि उन्हें अवैध निर्माण तो क्या, पूरी गली ही दिखाई नहीं दे रही थी। वे ऐसे ‘लापता’ थे जैसे जंगल में कोई सुई खो गई हो।

लेकिन चमत्कार तब हुआ, जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का जन्मदिन आया! अचानक नगरसेवक जी का ‘अवतार’ हो गया। अब आप खुद सोचिए, कोयला वाली गली की समस्या तो एक साल पुरानी है, लेकिन मंत्री जी का जन्मदिन तो मौका है, चोंका है! फटाक से प्रकट हुए, बड़े-बड़े पोस्टर लगवाए, फोटो खिंचवाई और आलाकमान को खुश कर दिया।

वशिष्ठ वाणी का व्यंग्य: वर्मा जी, ये जो ‘पोस्टर वाली चमक’ आप जन्मदिन पर दिखाते हैं, अगर उसका 1% भी ‘कोयला वाली गली’ के अवैध निर्माण पर दिखाते, तो मालाड में आज विकास का सूरज उग गया होता! लेकिन साहब का गणित साफ है—विकास करने से क्या होगा? आलाकमान खुश होगा तो ही तो नगरसेवक से मंत्री बनने की लॉटरी लगेगी!

ज्यादा दोष जनता का है या नेता का?

सच तो यह है कि हमारे मालाड की जनता भी ‘महान’ है। सब जानते हैं कि नेताजी 5 साल तक गहरी नींद में सोते हैं, पर चुनाव आते ही ‘बीमार’ से ‘मसीहा’ बन जाते हैं। जनता को पता है कि ये पोस्टर वाले नेताजी उनकी गली का नक्शा नहीं, बल्कि अपना भविष्य चमकाने में लगे हैं। फिर भी, चुनाव आते ही ‘जादुई तरीके से’ सब याददाश्त खो जाती है। नेताजी ने जनता को ‘मूड’ के हिसाब से हैंडल करना सीख लिया है—4 साल ‘इग्नोर’, 1 साल ‘इमोशनल अत्याचार’, और फिर अगली पंचवर्षीय योजना तैयार!

वशिष्ठ वाणी का सीधा अल्टीमेटम

योगेश वर्मा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का जन्मदिन मुबारक हो! लेकिन यह याद रखिएगा कि जन्मदिन के पोस्टर पर भले ही आपका चेहरा चमक जाए, पर भद्रन नगर की टूटी-फूटी सड़कों और अवैध निर्माण का दाग आपके पूरे राजनीतिक करियर पर है।

‘वशिष्ठ वाणी’ अब आपकी इस ‘लुका-छिपी’ को और नहीं होने देगी। कोयला वाली गली के अवैध निर्माण पर आपकी चुप्पी और जन्मदिन पर आपका ‘प्रकट’ होना, जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है। अब या तो आप अपनी ‘सेलेब्रिटी नींद’ से जागकर काम कीजिए, वरना अगली बार आलाकमान के पोस्टर पर आपका चेहरा ढूंढने के लिए जनता को दूरबीन लगानी पड़ेगी!

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