लोकप्रिय विषयमहाराष्ट्रसम्पादकीयकवितास्वास्थ्यअपराधअन्यवीडियो

संपादकीय: फुटपाथ पर जनता का अधिकार छीनकर चंद सिक्कों की ‘लालच’ में डूबी BMC, वशिष्ठ वाणी का आर-पार का संग्राम!

  • लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ

मुंबई जैसे महानगर की जीवनरेखा केवल इसकी सड़कें नहीं, बल्कि वे फुटपाथ भी हैं जो इस भागती-दौड़ती जिंदगी को गति देते हैं। लेकिन आज जब हम न्यू लिंक रोड और बांगुर नगर के सिग्नलों पर नजर डालते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि शहर का बुनियादी ढांचा अब जन-सुविधा का पर्याय नहीं रहा, बल्कि यह ‘व्यवस्था की विफलता’ का एक जीता-जागता स्मारक बन चुका है।

वशिष्ठ वाणी ने जब इन फुटपाथों की बदहाली पर कलम उठाई, तो हमारा उद्देश्य केवल एक रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि उस गहरी खाई को उजागर करना था जो प्रशासन और आम नागरिक के बीच बन चुकी है। आज यह सवाल हर उस मुंबईकर की जुबान पर है, जो अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क के बीच से गुजरने को मजबूर है—क्या फुटपाथ जनता की सुरक्षा के लिए हैं, या उन्हें चंद सिक्कों के ‘लालच’ में किसी निजी ‘धार्मिक व्यापार’ के नाम पर गिरवी रख दिया गया है?


• लेखअभिषेक अनिल वशिष्ठ •
(वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक)


BMC की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं। यदि यह अतिक्रमण अवैध है, तो प्रशासन की मूक सहमति इसे कानूनी जामा क्यों पहना रही है? यह स्पष्ट है कि जब-जब सत्ता में बैठे लोग जनहित के ऊपर ‘अवैध कमाई’ को तरजीह देते हैं, तो सबसे पहले पीड़ित आम नागरिक ही होता है। आज बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं फुटपाथ से बेदखल होकर सड़क पर आने को विवश हैं, जो एक सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।

वशिष्ठ वाणी स्पष्ट करना चाहती है कि हमारी कलम किसी के दबाव या लालच में न तो झुकी है और न झुकेगी। हमने इसे एक संघर्ष के रूप में लिया है। यदि 48 घंटों के भीतर प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर इन अवैध कब्जों को नहीं हटाता, तो हम इस लड़ाई को न्यायपालिका की चौखट तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह मामला अब केवल फुटपाथ खाली कराने का नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट व्यवस्था को चुनौती देने का है जो नागरिक अधिकारों को कुचलकर अपनी तिजोरियां भर रही है।

हमारा संकल्प अडिग है। हम उन कड़ियों को भी उजागर करेंगे जो इस अवैध अतिक्रमण को संरक्षण दे रही हैं। वशिष्ठ वाणी का यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक शहर की हर सड़क सुरक्षित और हर फुटपाथ आम आदमी के कदमों के लिए मुक्त नहीं हो जाता।

याद रखिए, सत्ता का अहंकार चाहे कितना भी बड़ा हो, कलम की गूंज और जनता की आवाज के सामने उसे झुकना ही पड़ता है।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment