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‘स्टॉप वर्क’ का नोटिस या रद्दी का टुकड़ा? जनकल्याण नगर में Dotom Builder का कानून को खुला ‘ठेंगा’!

रात-रात भर गरज रही मशीनें, बीएमसी के नोटिस के बाद भी काम जारी—क्या बिल्डर की जेब में है प्रशासन?

मुंबई: कानून का डर किसे होता है? शायद उस आम आदमी को जो एक छोटी सी गलती पर जुर्माना भरता है। लेकिन मलाड-कांदिवली वेस्ट के जनकल्याण नगर में डॉटॉम बिल्डर (Dotom Builder) के लिए कानून शायद किसी मजाक से कम नहीं है। बिलाबॉन्ग इंटरनेशनल स्कूल के पास चल रहे इस प्रोजेक्ट ने प्रशासन की नाक में दम कर रखा है, पर मजाल है कि किसी अधिकारी की फाइल बिल्डर की ऊंची पहुंच के आगे टिक पाए।

बीएमसी का नोटिस ‘बेअसर’, बिल्डर का पावर ‘फुल’

इलाके में रात-भर चलने वाले काम और शोर के खिलाफ स्थानीय स्तर पर लिखित शिकायत के बाद बीएमसी (BMC) ने ‘स्टॉप वर्किंग’ का नोटिस जारी किया था। नियम के मुताबिक, इस नोटिस के बाद ईंट का एक टुकड़ा भी हिलना अपराध है। लेकिन डॉटॉम डेवलपर ने इस नोटिस को कूड़ेदान के हवाले कर दिया। काम एक दिन भी नहीं रुका, बल्कि और रफ्तार से शुरू हो गया।



9 मई की रात: जब पुलिस को बोलना पड़ा ‘धप्पा’

कल रात (9 मई 2026) हद तो तब हो गई जब रात के 12 बजे तक निर्माण कार्य चालू था। जब मुंबई पुलिस को 100 नंबर पर कॉल किया गया, तब जाकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जबरन काम रुकवाया। लेकिन पुलिस के जाते ही बिल्डर के इरादे फिर से ‘बुलंद’ हो गए। आज फिर काम शुरू है!

बड़ा सवाल: अगर बीएमसी ने काम रोकने का आदेश दिया है, तो पुलिस के जाने के बाद दोबारा काम शुरू करने की हिम्मत डॉटॉम बिल्डर को कहाँ से मिल रही है?

बीएमसी-एसआरए (SRA) अधिकारियों की ‘चुप’ मिलीभगत?

यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि डॉटॉम बिल्डर को किसी बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है।

  1. क्या बीएमसी के अधिकारी सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी भूल गए हैं?
  2. क्या SRA के अधिकारी ‘लापता’ हैं या जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठे हैं?
  3. बिना किसी कानूनी अनुमति के रात-रात भर काम करना क्या ‘सरकारी चोरी’ की श्रेणी में नहीं आता?

कानून को इस तरह अंगूठा दिखाना न केवल अपराध है, बल्कि उन अधिकारियों के मुंह पर तमाचा है जो ईमानदारी का दावा करते हैं।

अब मांग है ‘FIR’ की!

नोटिस का समय बीत चुका है, अब कार्रवाई का वक्त है। अगर बीएमसी और एसआरए के अधिकारी इस खबर के बाद भी हरकत में नहीं आते, तो जनता को यह समझने में देर नहीं लगेगी कि ‘बिल्डर-अधिकारी नेक्सस’ कानून से ऊपर हो चुका है।

डॉटॉम बिल्डर पर तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए और साइट को तब तक सील किया जाना चाहिए जब तक कि वे कानून का सम्मान करना न सीख लें। प्रशासन को तय करना होगा कि मुंबई में ‘संविधान’ चलेगा या ‘बिल्डर की मनमानी’।


वशिष्ठ वाणी की विशेष रिपोर्ट: हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे, जब तक भ्रष्टाचार की इस नींव को कानून हिला नहीं देता!

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