मुंबई (मालाड): लोकशाही में जनता वोट इसलिए देती है ताकि नेता उनकी रक्षा करें, लेकिन मालाड वार्ड 35 की ‘कोयला वाली गली’ में जनता अब खुद से सवाल पूछ रही है। 24 दिन—यानी 576 घंटे बीत गए, लेकिन उत्तर मुंबई के सांसद पीयूष गोयल के पास इस अवैध निर्माण पर बोलने के लिए 24 सेकंड का भी समय नहीं मिला।
साहब, क्या कर्सन का ‘अवैध किला’ आपके विजन का हिस्सा है?
पीयूष गोयल जी, आप दुनिया भर में भारत के व्यापार और विकास का डंका बजाते हैं। क्या उस ‘विकसित भारत’ के नक्शे में मालाड का यह भू-माफिया ‘कर्सन’ भी शामिल है?
- 24 दिनों से मीडिया सबूत चिल्ला-चिल्ला कर दिखा रहा है, लेकिन आपकी खामोशी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या माफिया का कद आपके रसूख से भी ऊंचा हो गया है?
बीएमसी का ‘अंधा’ प्रशासन और सांसद का ‘वरदहस्त’?

पी/उत्तर वार्ड के सहायक आयुक्त कुंदन वळवी के पास 21 मई 2025 का नोटिस धूल फांक रहा है। सवाल यह है कि वळवी जैसे अधिकारियों को इतनी ‘हिम्मत’ कहाँ से मिलती है कि वे 24 दिनों तक एक सांसद के क्षेत्र में हो रहे अवैध काम को नजरअंदाज करें? क्या इस चुप्पी के पीछे कोई ‘बड़ा आशीर्वाद’ काम कर रहा है?

पूर्व रेल मंत्री जी, ये पटरियों के पास ‘मौत का सामान’ क्यों?
विडंबना देखिए, जिस नेता ने देश की रेलवे की कमान संभाली, उसी के संसदीय क्षेत्र में रेलवे सुरक्षा के नियमों को ठेंगा दिखाकर इमारत खड़ी कर दी गई।
“गोयल साहब, अगर कल को यहाँ कोई हादसा हुआ, तो क्या आप अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे? या तब भी आपकी चुप्पी इसी तरह कायम रहेगी?”
वशिष्ठ वाणी का अल्टीमेटम: 24 दिन हुए हैं, 24 साल नहीं!
प्रशासन और नेता शायद यह मान बैठे हैं कि ‘वशिष्ठ वाणी’ थक जाएगा। लेकिन हम याद दिला दें कि हमारी स्याही माफियाओं के पसीने से ज्यादा गाढ़ी है। जब तक कोयला वाली गली पर बीएमसी का बुलडोजर नहीं चलेगा, हमारे सवाल इसी तरह आपकी साख पर प्रहार करते रहेंगे।












