कांदिवली/मलाड (मुंबई): मुंबई के उपनगरों में विकास के नाम पर बिल्डरों की मनमानी अब कानून को सीधी चुनौती देने लगी है। जनकल्याण नगर (कांदिवली-मलाड वेस्ट) में डोटम बिल्डर (Dotom Builder) द्वारा की जा रही नियमों की अनदेखी ने यह साबित कर दिया है कि कुछ रसूखदार लोग खुद को संविधान और स्थानीय प्रशासन से ऊपर समझने की भूल कर रहे हैं।
वशिष्ठ वाणी की मुहिम लाई रंग, BMC ने थमाया नोटिस
स्थानीय निवासियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने वाली ‘वशिष्ठ वाणी’ की निरंतर शिकायतों और मुहिम के बाद, BMC (नगर निगम) ने कड़ा रुख अपनाते हुए डोटम बिल्डर के खिलाफ ‘स्टॉप वर्क’ (काम रोकने) का आधिकारिक नोटिस जारी किया है। बिल्डर पर रात के सन्नाटे में (3 से 5 बजे तक) निर्माण कार्य करने और प्रदूषण नियंत्रण के लिए अनिवार्य AQI मशीन को बंद रखने जैसे गंभीर आरोप हैं।
नोटिस को ठेंगा: रात के अंधेरे में धड़ल्ले से चल रहा काम
हैरानी की बात यह है कि BMC का नोटिस मिलने के बावजूद बिल्डर के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नोटिस जारी होने के बाद भी रात के समय निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। यह न केवल ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी आदेश की सरेआम अवहेलना भी है।
“बिल्डर को यह समझना होगा कि वह शहर का निर्माता हो सकता है, लेकिन कानून का निर्माता नहीं। वर्दी और प्रशासन का इकबाल सबके लिए बराबर है।”
जनता में आक्रोश: क्या होगा अगला एक्शन?
डोटम बिल्डर की इस ‘दबंगई’ से जनकल्याण नगर के निवासियों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर एक बिल्डर सरेआम नोटिस की धज्जियां उड़ा रहा है, तो प्रशासन की कार्रवाई का क्या अर्थ रह जाता है?
मुख्य चिंताएं:
- प्रदूषण का खतरा: AQI मशीन बंद रखकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
- नींद का अधिकार: देर रात तक काम होने से बुजुर्गों और बच्चों की नींद में खलल पड़ रहा है।
- कानून का डर: क्या प्रशासन अब बिल्डर पर दंडात्मक कार्रवाई या FIR दर्ज करेगा?
निष्कर्ष: यह मामला अब केवल एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि कानून की गरिमा का बन चुका है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘स्टॉप वर्क’ का मतलब ‘काम बंद’ ही हो। डोटम बिल्डर को यह सबक मिलना जरूरी है कि ईंट-पत्थर की इमारतें खड़ी करने वाला शख्स देश के कानून से बड़ा कभी नहीं हो सकता।













