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विशेष रिपोर्ट: सत्ता का अहंकार या माफिया से प्यार? पीयूष गोयल के क्षेत्र में ‘कर्सन’ का अवैध राज!

मुंबई, मालाड (वार्ड 35): क्या भाजपा के नेताओं ने यह मान लिया है कि वे जनता के प्रति नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी कुर्सी के प्रति जवाबदेह हैं? मुंबई उत्तर के सांसद और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के संसदीय क्षेत्र में स्थित ‘कोयला वाली गली’ आज सिस्टम की लाचारी का जीता-जागता प्रमाण बन गई है। ‘वशिष्ठ वाणी’ द्वारा लगातार किए जा रहे खुलासों के बावजूद, पीयूष गोयल की चुप्पी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या दिल्ली की राजनीति में वे इतने व्यस्त हो गए हैं कि उन्हें मालाड में मरता हुआ कानून नजर नहीं आता?

“सरकार हमारी है, हम कुछ भी करें” – क्या यही है भाजपा का नया चेहरा?

मालाड के गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के नेताओं को अब मीडिया या न्यूज़ रिपोर्ट्स का कोई खौफ नहीं रहा। उन्हें लगता है कि न्यूज़पेपर में नाम आए या सोशल मीडिया पर फजीहत हो, उनकी सत्ता को कोई हिला नहीं सकता। इसी अहंकार की ओट में भू-माफिया कर्सन रेलवे ट्रैक के पास नियमों की धज्जियां उड़ाकर अवैध इमारतें खड़ी कर रहा है।


रेलवे ट्रैक के पास ‘खतरे की घंटी’, फिर भी गोयल मौन!

रेलवे ट्रैक के पास अवैध निर्माण न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि हज़ारों यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है।

  • क्या रेल मंत्री रह चुके पीयूष गोयल को इन खतरों का अंदाजा नहीं है?
  • क्या कर्सन का यह अवैध किला भाजपा के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर भारी पड़ रहा है?
  • जब जागरूक नागरिकों पर जानलेवा हमले होते हैं, तो सांसद जी के पास समय क्यों नहीं होता?

जनता की अदालत में होगा हिसाब

नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारें जनता बनाती है, माफिया नहीं। न्यूज़ रिपोर्ट्स को नजरअंदाज करना आपकी ताकत नहीं, बल्कि आपकी प्रशासनिक विफलता है। अगर ‘कोयला वाली गली’ पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में जनता का यही आक्रोश भाजपा के वोट बैंक को ‘कोयले’ की तरह काला कर देगा।

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