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मुंबई: मलाड में भू-माफियाओं के आगे BMC नतमस्तक? शिकायतकर्ता पर हमले के बाद भी अवैध निर्माण जारी

मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मुंबई के मलाड (पश्चिम) क्षेत्र में प्रशासन और भू-माफियाओं के बीच कथित मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। भदरण नगर, रोड नंबर 1 (रेलवे ट्रैक के पास), कोयला वाला गली में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माण ने बीएमसी (BMC) के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय पत्रकारिता और वशिष्ठ वाणी की रिपोर्टों के अनुसार, बीएमसी अधिकारी और स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं।


“सबूत आपके सामने है! बीएमसी के इस आदेश के बावजूद मलाड वेस्ट में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। क्या कमिश्नर अश्विनी भिड़े और प्रशासन इस गुंडागर्दी पर लगाम लगाएंगे?”


अधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल

मामले में बीएमसी (BMC) अधिकारी कुंदन वाल्वी की भूमिका संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बार-बार शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद, उक्त अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के बजाय उसे संरक्षण दिया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस संवेदनशील विषय की जानकारी मुंबई की पूर्व मेयर ऋतु तावड़े और बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े तक को दी गई है, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।


अधिकारी ‘कुंदन वाल्वी’ की चुप्पी का नतीजा! शिकायतकर्ता खून से लथपथ है और भू-माफिया बेखौफ। आखिर किसके इशारे पर मलाड वेस्ट में हो रहा है यह अत्याचार?


शिकायतकर्ता पर जानलेवा हमला

खबर के अनुसार, अवैध निर्माण के खिलाफ आवाज उठाने वाले सजग नागरिक जिग्नेश परमार पर भू-माफिया कर्सन ने जानलेवा हमला कर दिया। जिग्नेश का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने नियम विरुद्ध हो रहे निर्माण के खिलाफ बीएमसी में शिकायत दर्ज कराई थी। बीएमसी ने पत्र जारी कर निर्माण रोकने का आदेश तो दिया, लेकिन उस आदेश का पालन करवाने के बजाय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, जिससे भू-माफिया के हौसले बुलंद हो गए।

प्रशासन और पुलिस की चुप्पी

स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफिया कर्सन का आतंक इतना है कि मलाड पुलिस और बीएमसी के अधिकारी उसके आगे नतमस्तक हैं। कर्सन पर कई मामले दर्ज होने के बाद भी उसके विरुद्ध ‘तड़ीपार’ जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

बड़ा सवाल: क्या मुंबई में कानून का राज खत्म हो चुका है? क्या बीएमसी अधिकारी अपनी मर्जी से शहर के नियमों की धज्जियां उड़ाने की अनुमति दे रहे हैं? अगर एक शिकायतकर्ता सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता प्रशासन से क्या उम्मीद रखे?

फिलहाल, अवैध निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या कोर्ट के हस्तक्षेप का इंतजार कर रहा है।

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