मुंबई/वशिष्ठ वाणी: क्या सरकारी कागजों पर होने वाली ‘कार्रवाई’ और जमीन पर दिखने वाली ‘हकीकत’ के बीच का रिश्ता खत्म हो चुका है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि मलाड वेस्ट के लिंक रोड की वे तस्वीरें पूछ रही हैं, जो प्रशासन के गाल पर एक करारे तमाचे जैसी हैं।
📸 दावों की धज्जियाँ उड़ाती तस्वीरें
हाल ही में गोरेगांव ट्रैफिक विभाग ने सीना ठोककर दावा किया था कि जैन सबकुछ फूड प्लाजा के बाहर अवैध पार्किंग पर ‘कड़ी कार्रवाई’ की गई है। लेकिन 30 मार्च की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया।
- हकीकत: फूड प्लाजा के बाहर फुटपाथ आज भी वाहनों से अटा पड़ा है।
- सवाल: अगर कार्रवाई हुई, तो क्या वह केवल ‘सेल्फी’ लेने तक सीमित थी?
💸 पर्याप्त पार्किंग, फिर भी सड़क पर कब्जा क्यों?
हैरानी की बात यह है कि संबंधित प्रतिष्ठान के पास पार्किंग की अपनी जगह मौजूद है। इसके बावजूद सार्वजनिक फुटपाथ को ‘निजी जागीर’ समझकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
बड़ा सवाल: क्याMumbai RTOऔर BMC की मेहरबानी के बिना यह संभव है? आखिर क्यों आम जनता को सड़क पर चलने के लिए मजबूर किया जा रहा है?
🔍 कागजी घोड़ों की दौड़
प्रशासन की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है और कुछ ही घंटों बाद स्थिति फिर ‘जस की तस’ हो जाती है। क्या यह अधिकारियों और रसूखदारों के बीच की ‘मूक सहमति’ है?
वशिष्ठ वाणी की चेतावनी: यह मामला केवल पार्किंग का नहीं, बल्कि सिस्टम की ईमानदारी का है। जब तक फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए मुक्त नहीं होते, हमारी रिपोर्टिंग जारी रहेगी। प्रशासन को अब ‘कागजी कार्रवाई’ छोड़कर जमीन पर उतरना होगा।













