मुंबई (वशिष्ठ वाणी): मालवणी के सामना नगर स्थित स्वप्नपूर्ति सोसायटी में विवाद अब एक नए मोड़ पर आ गया है। म्हाडा क्षेत्र निर्माण (गोरेगांव) द्वारा फेडरेशन को अवैध पार्किंग और अवैध निर्माण के लिए ₹1,08,000 का भारी जुर्माना ठोकने के बाद भी अध्यक्ष बालासाहेब भगत के तेवर नरम होने के बजाय और तीखे हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अध्यक्ष अब पूरी बिल्डिंग को खंडहर बनाने पर तुले हुए हैं।
“सब लीगल है” – प्रशासन को खुली चुनौती?
हैरानी की बात यह है कि म्हाडा के आधिकारिक नोटिस और जुर्माने के बावजूद अध्यक्ष का मानना है कि वह जो कर रहे हैं, वह पूरी तरह वैध है। उनका तर्क है कि आपातकालीन रास्तों पर अवैध पार्किंग करवाना गलत नहीं है।
- अजीब तर्क: अध्यक्ष का कहना है कि आग लगने पर फायर ब्रिगेड मालवणी नंबर 1 से आएगी, जहाँ पहले से गाड़ियाँ खड़ी हैं।
- सवाल: क्या बाहर की अव्यवस्था का बहाना बनाकर आप अपनी सोसायटी के सुरक्षित रास्तों को भी ब्लॉक कर देंगे? क्या एक गलती को दूसरी गलती से सही ठहराया जा सकता है?
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15 साल का ‘पद’ और अहंकार का चरम
जब कोई व्यक्ति 15 साल तक एक ही कुर्सी पर बैठा रहता है, तो उसे लगने लगता है कि नियम उसके लिए नहीं बने हैं।
- AGM में चुनौती: बताया जा रहा है कि AGM मीटिंग में अध्यक्ष ने खुले तौर पर चुनौती दी है कि “चाहे कुछ भी हो जाए, वह पद से नहीं हटेंगे।”
- अव्यवस्था का साम्राज्य: आपातकालीन रास्तों को पार्किंग बनाकर लॉक कर दिया गया है और बिल्डिंग 1D को ऑटो स्टैंड में तब्दील कर दिया गया है। सामना नगर की सुंदरता और सुरक्षा अब ‘खंडहर’ में तब्दील होती दिख रही है।

म्हाडा की कार्रवाई के बाद भी चुप्पी क्यों?
प्रमाण सामने हैं, म्हाडा का नोटिस सामने है, ₹1.08 लाख का जुर्माना लग चुका है—फिर भी यह व्यक्ति अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। जनता पूछ रही है:
- क्या कोई एक व्यक्ति पूरी सोसायटी की सुरक्षा को दांव पर लगा सकता है?
- कांडिवली ट्रैफिक पुलिस की ‘मेहरबानी’ से सड़कों पर जो पार्किंग हो रही है, क्या उसका फायदा उठाकर अंदर भी अवैध काम जारी रहेगा?
- प्रशासन ऐसे व्यक्ति को पद से हटाने में देरी क्यों कर रहा है जो खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है?
बड़ा सवाल
क्या कोई व्यक्ति अपनी मनमानी से पूरी सोसायटी को खतरे में डाल सकता है?
क्या प्रशासन इस पर समय रहते कार्रवाई करेगा या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा?
वशिष्ठ वाणी दैनिक यह स्पष्ट करता है कि जब तक इस पूरे मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह मुद्दा लगातार उठाया जाता रहेगा और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा जाता रहेगा।












