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एक दिन का चालान या फुटपाथ पर कब्ज़े को खुली छूट?

सवाल आज भी वहीं खड़ा है—क्या मुंबई में फुटपाथ पर अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ रोज़ाना कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी केवल कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रहेगा?

मलाड वेस्ट के लिंक रोड पर स्थित जैन सबकुछ फूड प्लाजा, टाटा मोटर्स कार शोरूम, हुंडई कार शोरूम और आसपास के कुछ अन्य प्रतिष्ठानों के बाहर फुटपाथ पर वाहन खड़े होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इस विषय को लेकर मीडिया ने प्रमाणों के साथ आवाज़ उठाई, सोशल मीडिया पर संबंधित अधिकारियों से सवाल पूछे और समाचार पत्र में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

लेख: अभिषेक अनिल वशिष्ठ
(वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के स्वामी/प्रकाशक)

मुंबई RTO की ओर से सोशल मीडिया पर यह कहा गया कि शिकायत मिलने के बाद तीन वाहनों का चालान काटा गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या एक दिन चालान काट देने से फुटपाथ पर होने वाली पार्किंग हमेशा के लिए बंद हो जाएगी?

स्पष्ट रूप से इसका उत्तर “नहीं” है।

क्योंकि आज भी लिंक रोड पर वही दृश्य दिखाई देता है—फुटपाथ पर खड़ी गाड़ियाँ और सड़क के बीच से गुजरने को मजबूर पैदल यात्री। यदि समस्या जड़ से खत्म करनी है, तो केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं बल्कि नियमित और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होती है।


❓ कानून सबके लिए बराबर या अलग-अलग?

ट्रैफिक नियमों का उद्देश्य शहर में व्यवस्था बनाए रखना है। लेकिन जब नियमों का पालन केवल आम जनता तक सीमित रह जाए और प्रभावशाली स्थानों पर ढील दिखाई दे, तो यह स्वाभाविक है कि लोग सवाल उठाएँ।

क्या मुंबई RTO के पास ऐसा कोई कानून है जो उन्हें अपने हिसाब से कार्रवाई करने की छूट देता हो?
यदि ऐसा कोई नियम नहीं है, तो फिर प्रमाण और शिकायतों के बावजूद नियमित कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?


✍️ कटाक्ष

अक्सर देखा जाता है कि ट्रैफिक विभाग शहर के अलग-अलग हिस्सों में चालान और टोइंग की कार्रवाई में काफी सक्रिय रहता है। लेकिन जब मामला बड़े प्रतिष्ठानों या प्रभावशाली स्थानों से जुड़ा होता है, तो कार्रवाई अचानक धीमी पड़ जाती है।

यही कारण है कि आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि क्या नियमों का पालन हर जगह समान रूप से कराया जा रहा है।


⚖️ निष्कर्ष

फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बनाए जाते हैं, न कि स्थायी पार्किंग के लिए। यदि इस समस्या को सच में खत्म करना है, तो संबंधित विभागों को नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई करनी होगी।

क्योंकि जब कानून का पालन हर जगह समान रूप से नहीं होता, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या नियम व्यवस्था बनाए रखने के लिए हैं, या केवल चुनिंदा लोगों पर लागू करने के लिए?

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