मुंबई/वशिष्ठ वाणी। मलाड स्थित NLANJANA Co-Op. Housing Society Ltd में संचालित SHOBHA Diagnostic Centre को लेकर पार्किंग व्यवस्था का विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस मामले में वशिष्ठ मीडिया हाउस प्राइवेट लिमिटेड ने सीधे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से जवाब तलब किया है।
वशिष्ठ मीडिया हाउस के चेयरमैन एवं समूह दैनिक समाचार पत्र के प्रकाशक श्री अभिषेक अनिल वशिष्ठ ने सवाल उठाया है कि—
जब डायग्नॉस्टिक सेंटर के पास परिसर में पार्किंग उपलब्ध नहीं है,
तो इसे वहां संचालन की अनुमति आखिर किसने और किस आधार पर दी?
मरीज के परिजनों को गेट से लौटाने के आरोप
मौके से मिली जानकारी के अनुसार, जब भी मरीज या उनके परिजन जांच के लिए SHOBHA Diagnostic Centre पहुंचते हैं और वाहन के साथ सोसायटी में प्रवेश करना चाहते हैं, तो कथित रूप से सोसायटी सुरक्षा कर्मी उन्हें बाहर ही रोक देते हैं।
बताया जा रहा है कि—
- बाहरी वाहनों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाती,
- पार्किंग के लिए बाहर जाने को कहा जाता है,
- और वैकल्पिक व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी मौके पर नहीं दी जाती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीज असमंजस में पड़ जाते हैं कि वाहन आखिर खड़ा कहां करें।
‘पार्किंग कहीं और’— लेकिन मौके पर क्यों नहीं बताया जाता?
विवाद में नया पहलू तब सामने आया जब मीडिया की लीगल टीम द्वारा नोटिस भेजे जाने के बाद SHOBHA Diagnostic Centre की ओर से कथित रूप से कहा गया कि उनकी पार्किंग व्यवस्था किसी अन्य स्थान पर है।
यहीं पर वशिष्ठ मीडिया हाउस ने गंभीर सवाल उठाया है।
मीडिया हाउस का कहना है कि—
- यदि वास्तव में वैकल्पिक पार्किंग उपलब्ध है,
- तो सोसायटी गेट पर रोके जाने के समय
- सेंटर का कोई कर्मचारी बाहर आकर मरीजों को मार्गदर्शन क्यों नहीं देता?
आरोप है कि जब मरीजों को रोका जाता है, उस समय सेंटर के कर्मचारी अंदर ही रहते हैं और पार्किंग के वैकल्पिक स्थान की जानकारी मौके पर नहीं दी जाती।
नोटिस के बाद बदला रुख?
वशिष्ठ मीडिया हाउस का दावा है कि—
- पहले मौके पर पार्किंग को लेकर कोई स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं दिया गया,
- लेकिन जब लीगल सलाहकार श्री ओम प्रकाश मिश्रा द्वारा नोटिस भेजा गया,
- तब जवाब में कहा गया कि पार्किंग कहीं और उपलब्ध है।
मीडिया हाउस ने इसे “सवाल से ध्यान भटकाने” की कोशिश बताया है, हालांकि इस पर सेंटर की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
अब BMC से बड़ा सवाल: क्या ‘ऑफ-साइट पार्किंग’ मान्य है?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न BMC की ओर उठाया गया है।
वशिष्ठ मीडिया हाउस ने नगर निगम से पूछा है—
🔴 क्या किसी कमर्शियल प्रतिष्ठान को अनुमति दी जा सकती है कि, शॉप एक जगह हो और पार्किंग कहीं और दिखाई जाए?
🔴 यदि पार्किंग दूर स्थित है, तो क्या यह नियमों के अनुरूप माना जाएगा?
🔴 क्या संबंधित डायग्नॉस्टिक सेंटर को ऐसी कोई आधिकारिक मंजूरी BMC से प्राप्त है?
🔴 यदि हां, तो अनुमति पत्र सार्वजनिक किया जाए।
🔴 यदि नहीं, तो क्या BMC इस मामले में कार्रवाई करेगी?
‘अनुमति है तो दस्तावेज दिखाएं’
अभिषेक वशिष्ठ ने कहा है कि यदि सेंटर के पास वैध अनुमति है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनके अनुसार—
“यदि नियमों के तहत अनुमति दी गई है तो दस्तावेज सामने आएं,
अन्यथा संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई करे।”
कानूनी कार्रवाई के संकेत
वशिष्ठ मीडिया हाउस ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वे उपयुक्त कानूनी मंच का दरवाजा खटखटाने के लिए तैयार हैं।
उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल एक सेंटर तक सीमित नहीं, बल्कि शहरी नियमन और नागरिक सुविधा से जुड़ा व्यापक प्रश्न है।
अब निगाहें BMC के जवाब पर
फिलहाल पूरे मामले में BMC, सोसायटी प्रबंधन और SHOBHA Diagnostic Centre—तीनों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
जैसे ही किसी पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आएगा, उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।













