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अकड़ या प्रशासनिक लाचारी? ‘वशिष्ठ वाणी’ में खबर छपने के बाद भी 24 घंटे खुलेआम सड़क पर बना है भारत गैस का अवैध गोदाम!

वशिष्ठ वाणी | विशेष

  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, महाराष्ट्र की जनता पूछ रही है: आख़िर ऐसे बेखौफ अफसरों पर निलंबन और तबादले की कार्रवाई से सरकार क्यों हिचक रही है?

मुंबई ब्यूरो: कांदिवली वेस्ट के भूमि पार्क रोड और छत्रपति शिवाजी राजे कॉम्प्लेक्स के बाहर 25 हजार नागरिकों की जान पर मंडरा रहा खतरा अब सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार और गृह विभाग के प्रशासनिक तंत्र पर सबसे बड़ा सवालिया निशान बन चुका है। दैनिक समाचार पत्र ‘वशिष्ठ वाणी’ में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद भी ज़मीनी हकीकत में एक इंच का बदलाव नहीं आया है। भारत गैस के दर्जनों सिलेंडर लदे वाहन आज भी 24 घंटे सड़क को ‘खुला गोदाम’ बनाकर डटे हुए हैं।

न कांदिवली ट्रैफिक विभाग की नींद खुली, न उत्तर परिक्षेत्र के एसीपी कार्यालय ने कोई ठोस कदम उठाया, और न ही गृह मंत्रालय के स्तर से इस पर अब तक कोई सख्त संज्ञान लिया गया।

1. 24 घंटे सड़क पर ‘बारूद’: जब अखबार में खबर छपने पर भी नहीं हिली पुलिस

आमतौर पर जब मीडिया किसी जनहित के गंभीर मुद्दे को उजागर करता है, तो स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचता है। लेकिन कांदिवली में स्थिति यह है कि अधिकारियों का मनोबल टूटने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है।

  • बेखौफ अवैध गतिविधियां: दिन हो या रात, सिलेंडर से लदी भारी-भरकम गाड़ियां सड़क को लॉक करके खड़ी रहती हैं।
  • पुलिस की खामोशी: कांदिवली ट्रैफिक पुलिस और एसीपी कार्यालय की इस खामोशी से साफ संदेश जा रहा है कि स्थानीय अधिकारियों को न तो जनता की सुरक्षा का डर है और न ही मीडिया की खबरों की परवाह।

2. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधा सवाल: जनता की जान बचाना किसकी जिम्मेदारी?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में 25,000 नागरिकों की सुरक्षा का सीधा दायित्व आपके कंधों पर है। जनता पूछ रही है:

  1. अधिकारियों पर संज्ञान क्यों नहीं?: जब मीडिया लगातार सबूतों के साथ खबर प्रकाशित कर रहा है, तो ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा?
  2. तबादला या निलंबन (Suspension) क्यों नहीं?: जब अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर 24 घंटे सड़क को गोदाम बनने दे रहे हैं, तो उन्हें तुरंत निलंबित क्यों नहीं किया जाता? क्या प्रशासनिक ढिलाई को बढ़ावा देना ही व्यवस्था की नीति बन गई है?
  3. मनोबल बढ़ाने वाली खामोशी: जब तक शीर्ष नेतृत्व सख्त कदम नहीं उठाएगा, तब तक निचले स्तर के अधिकारी इसी तरह बेफिक्र होकर अपना काम टालते रहेंगे।

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