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क्या ‘प्रतिदिन कार्रवाई’ सिर्फ एक कोरा जुमला है? बीएमसी अधिकारी प्रवीण वाघेला के दावों की खुली पोल: कुछ ही मिनटों में वापस कैसे मिल जाता है जब्त सामान?

मुंबई: मालाड वेस्ट के जन कल्याण नगर रोड (सेंट जूड स्कूल के सामने, दिव्या पार्क और बफिरा नगर) पर बीएमसी अतिक्रमण विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक प्रवीण वाघेला (Praveen Vaghela) की कार्यशैली पर अब शहर में तीखे सवाल उठने लगे हैं। ‘वशिष्ठ वाणी’ की खबर के बाद अधिकारी प्रवीण वाघेला ने मीडिया को बड़े-बड़े दावे करते हुए सीना ठोककर कहा था कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वे “रोजाना (Daily) कार्रवाई करेंगे।”

लेकिन, साहब के उन जुबानी दावों और धरातल की सच्चाई के बीच का फासला अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। आइए समझते हैं इस पूरे खेल के पीछे का काला सच!

कार्रवाई के कुछ ही मिनटों बाद फुटपाथ पर कैसे लौट आती है रौनक?

धरातल की हकीकत यह है कि बीएमसी की टीम जब कभी कागजी खानापूर्ति करने पहुँचती है, तो थोड़ा-बहुत सामान जब्त करके ले जाती है। आम तौर पर किसी छोटे फेरीवाले या दुकानदार का सामान जब्त होने के बाद नया सामान जुटाने और पैसे इकट्ठे करने में कई दिन लग जाते हैं।

तो फिर बड़ा सवाल यह है कि: कार्रवाई के महज कुछ ही मिनटों या घंटों के भीतर वही फुटपाथ दोबारा ठेले-मंडी से कैसे घिर जाता है?

सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, खेल यहीं पर छिपा हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि बीएमसी अधिकारी सांठगांठ के तहत जब्त किया गया सामान या तो तुरंत वापस कर देते हैं या फिर मिलीभगत से यह सारा खेल सिर्फ दिखावे के लिए चलाया जाता है।

7 दिन तक सन्नाटा और मीडिया की खबर के बाद जागा प्रशासन

अधिकारी प्रवीण वाघेला ने मीडिया से वादा किया था कि वे इस अवैध कब्जे को जड़ से मिटाने के लिए प्रतिदिन (Daily) डंडा चलाएंगे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगातार 7 दिनों तक मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, चारों तरफ पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा।

जब ‘वशिष्ठ वाणी’ ने इस 7 दिन के जीरो एक्शन की पोल खोलती हुई खबर फिर से प्रकाशित की, तो उसके अगले ही दिन अचानक बीएमसी का अमला हरकत में आ गया।

जनता का सीधा सवाल: क्या ‘प्रतिदिन कार्रवाई’ सिर्फ एक छलावा है?

अब जन कल्याण नगर की जनता और स्थानीय नागरिक अधिकारी प्रवीण वाघेला से यह सीधा सवाल पूछ रहे हैं—

  1. क्या मीडिया को दिया गया “प्रतिदिन कार्रवाई” का बयान सिर्फ एक कोरा जुमला और ढकोसला था?
  2. क्या बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी सिर्फ मीडिया की सुर्खियों और तीखे कटाक्ष से बचने के लिए एक दिन की खानापूर्ति करते हैं और बाकी के दिन कुंभकर्णी नींद सोते हैं?

‘वशिष्ठ वाणी’ इन कागजी वादों और प्रशासनिक ड्रामों की पोल तब तक खोलता रहेगा, जब तक जन कल्याण नगर के इन रास्तों को इस अवैध दलदल से हमेशा के लिए मुक्त नहीं करा दिया जाता। जब तक कार्रवाई कागजों के बजाय जमीन पर नजर नहीं आएगी, तब तक हमारा यह तीखा पहरा जारी रहेगा!

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